भगवान राम आरती
भगवान राम · Ram · आरती
भगवान राम आरती के बोल
॥ आरती कीजै श्री जनक लली की ॥
आरती कीजै श्री जनक लली की।
राम-मधुप-मन कमल कली की॥
रामचन्द्र मुख-चन्द्र चकोरी। अन्तर साँवर बाहर गोरी॥
सकल सुमंगल सुफल फली की॥
॥ आरती कीजै श्री जनक लली की ॥
पिय दृग-मृग जुग बन्धन-डोरी। पिय प्रेम-रस-राशि किशोरी॥
पिय मन गति विश्राम थली की॥
॥ आरती कीजै श्री जनक लली की ॥
रूप-राशि गुण-निधि जग-स्वामिनि। प्रेम-प्रवीन राम-अभिरामिनि॥
सरबस धन "हरिचन्द" अली की॥
आरती कीजै श्री जनक लली की।
राम-मधुप-मन कमल कली की॥