श्री गणेश आरती
श्री गणेश · Ganesha · आरती
श्री गणेश आरती के बोल
॥ श्री गणपति आरती — श्रीगनपति भज प्रगट पार्वती ॥
श्रीगनपति भज, प्रगट पार्वती-अंक बिराजत अविनासी।
ब्रह्मा-विष्नु-सिवादि सकल सुर, करत आरती उल्लासी॥१॥
त्रिसूलधर को भाग्य मानिकैं, सब जुरि आये कैलासी।
करत ध्यान, गन्धर्व गान-रत, पुष्पन की हो वर्षा-सी॥२॥
धनि भवानि, व्रत साधि लह्यो जिन, पुत्र परम गोलोकासी।
अचल अनादि अखण्ड परात्पर, भक्तहेतु भव-परकासी॥३॥
विद्या-बुद्धि-निधान गुनाकर, बिघ्नविनासन दुखनासी।
तुष्टि पुष्टि सुभ लाभ लक्ष्मि सँग, रिद्धि सिद्धि-सी हैं दासी॥४॥
सब कारज जग होत सिद्ध सुभ, द्वादस नाम कहे छासी।
कामधेनु चिन्तामनि सुरतरु, चार पदारथ देतासी॥५॥
गज-आनन सुभ सदन, रदन इक, सुंडि ढुंढि पुर पूजा-सी।
चार भुजा मोदक-करतल सजि, अंकुस धारत फरसा-सी॥६॥
ब्याल सूत्र, त्रयनेत्र, भाल ससि, उन्दुर-वाहन सुखरासी।
जिनके सुमिरन सेवन करते, टूट जात जम की फाँसी॥७॥
"कृष्णपाल" धरि ध्यान निरन्तर, मन लगाय जो कोई गासी।
दूर करें भव की बाधा प्रभु, मुक्ति जन्म निजपद पासी॥८॥