ॐ नमः शिवाय

भगवान शिव का पंचाक्षर महामंत्र

परिचय

'ॐ नमः शिवाय' भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली मंत्र है। यह पंचाक्षर मंत्र शिवजी को समर्पित है और इसका अर्थ है 'मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ'। इस मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है, नकारात्मकता दूर होती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह मंत्र शिव भक्तों के लिए अत्यंत प्रिय है और इसे किसी भी समय, किसी भी स्थान पर जपा जा सकता है। यह मंत्र शिवजी के पंचतत्व स्वरूप का भी प्रतीक है और इसे मोक्ष का मार्ग माना जाता है।

तिथि / समय

'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु सुबह ब्रह्म मुहूर्त में और शाम को प्रदोष काल में इसका जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, अतः इस दिन इस मंत्र का जाप करने से अधिक पुण्य प्राप्त होता है।

पूजा विधि

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. शांत और पवित्र स्थान पर आसन बिछाकर बैठें।
  3. भगवान शिव का ध्यान करें और मन को एकाग्र करें।
  4. रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जाप करें।
  5. जाप करते समय मन में शिवजी का ध्यान बनाए रखें और मंत्र के अर्थ पर चिंतन करें।
  6. जाप की संख्या अपनी श्रद्धा अनुसार निर्धारित करें, परंतु कम से कम 108 बार जाप करना उत्तम माना जाता है।

मंत्र

ॐ नमः शिवाय

ॐ - यह ब्रह्मांडीय ध्वनि है जो सभी मंत्रों का मूल है। नमः - नमस्कार करना या प्रणाम करना। शिवाय - भगवान शिव को। इस प्रकार, 'ॐ नमः शिवाय' का अर्थ है 'मैं भगवान शिव को प्रणाम करता हूँ' या 'मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ'।

श्लोक / दोहे

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै 'न' काराय नमः शिवाय॥

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै 'म' काराय नमः शिवाय॥

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै 'शि' काराय नमः शिवाय॥

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै 'व' काराय नमः शिवाय॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय। दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै 'य' काराय नमः शिवाय॥

फल एवं महत्व

'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करने से अनेक प्रकार के शुभ फल प्राप्त होते हैं। यह मंत्र मन को एकाग्र करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है। इसके निरंतर जाप से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के भय तथा चिंताएँ दूर होती हैं।

यह मंत्र भक्तों को मोक्ष की ओर अग्रसर करता है और सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाता है। शिव पुराण के अनुसार, इस मंत्र के जाप से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। यह मंत्र असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाने और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक माना जाता है।

संदर्भ स्रोत

शिव पुराण, स्कंद पुराण, कल्याण पत्रिका