नाड़ी दोष
अष्टकूट का नाड़ी कूट
नाड़ी दोष क्या है
विवाह-मिलान में वर व वधू दोनों की जन्म-नक्षत्र आधारित नाड़ी (आदि, मध्य अथवा अन्त्य) एक ही हो तो नाड़ी दोष बनता है। अष्टकूट के 36 गुणों में नाड़ी कूट के 8 अंक होते हैं — समान नाड़ी पर ये आठों शून्य हो जाते हैं।
शास्त्र इसे क्यों देखता है
नाड़ी को शास्त्र में संतान व स्वास्थ्य से जोड़ा गया है, इसीलिए अष्टकूट में इसे सर्वाधिक अंक दिए गए हैं।
भंग / परिहार — कब दोष शमित माना जाता है
- वर व वधू का नक्षत्र समान हो किंतु चरण भिन्न हों — तब दोष शमित माना जाता है।
- राशि समान हो और नक्षत्र भिन्न हों — तब भी शमन कहा गया है।
- राशि-स्वामियों में मैत्री होने पर बल घटता है।
शास्त्र-सम्मत उपाय
महामृत्युंजय मंत्र का जप तथा योग्य आचार्य से पूर्ण कुंडली-परीक्षण। शास्त्र में नाड़ी दोष के परिहार स्पष्ट दिए गए हैं।
एक आवश्यक बात
नाड़ी दोष केवल चन्द्र-नक्षत्र से बनता है। मंगल दोष, लग्न-मिलान व दशा-साम्य देखे बिना अकेले इसी पर विवाह का निर्णय नहीं किया जाता।
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अपनी कुंडली में देखें
आपकी जन्म-कुंडली में नाड़ी दोष बनता है या नहीं, और यदि बनता है तो कौन-सा परिहार लागू होता है — ज्योतिष आचार्य से पूछें। पहला प्रश्न निःशुल्क है।