गुरु गोचर 2026 — सिंह राशि

आगामी गोचर · 31 अक्टू॰ 2026 से 25 जन॰ 2027 तक

गोचर विवरण

ग्रहगुरु (Guru (Jupiter))
राशिसिंह
प्रवेश31 अक्टू॰ 2026
राशि में रहेंगे25 जन॰ 2027 तक (लगभग 3 माह)
स्थितिआगामी गोचर
गरिमासामान्य
अगला गोचरकर्क राशि में 25 जन॰ 2027 से

गुरु गोचर का अर्थ क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रह का आकाश में एक राशि से दूसरी राशि में जाना। गुरु लगभग एक वर्ष प्रति राशि की गति से चलते हैं, इसलिए इनका सिंह राशि में 31 अक्टू॰ 2026 से आरंभ हुआ यह काल लगभग 3 माह तक रहता है।

गुरु परम शुभ ग्रह — जहाँ दृष्टि डालता है वहाँ वृद्धि करता है हैं और मुख्यतः ज्ञान, धर्म, गुरु, संतान, धन-संचय व विवाह (कन्या हेतु पति) के कारक माने गए हैं। ये जिस राशि में जाते हैं, उससे संबंधित भाव के विषय सक्रिय हो जाते हैं — और वही विषय हर जातक की चन्द्र-राशि के अनुसार भिन्न भाव में पड़ता है, इसीलिए एक ही गोचर सबके लिए एक जैसा फल नहीं देता।

सिंह अग्नि-तत्व की स्थिर राशि है, जिसके स्वामी सूर्य हैं — आत्म-प्रधान, नेतृत्व का। गुरु यहाँ सामान्य बल में हैं, अतः फल कुंडली के अन्य योगों पर अधिक निर्भर रहेगा।

सभी 12 राशियों पर गुरु गोचर का फल

राशिचन्द्र से भावफल
मेष5 (संतान व विद्या)शुभ — संतान-सुख व विद्या-बुद्धि का शुभ फल; रचनात्मक कार्य सधेंगे।
वृषभ4 (गृह-सुख व माता)मध्यम — गृह-कार्यों में धीमी गति; माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
मिथुन3 (पराक्रम व साहस)मध्यम — प्रयास का फल कुछ विलंब से; धैर्यपूर्वक परिश्रम जारी रखें।
कर्क2 (धन व कुटुंब)शुभ — धन-संचय व कुटुंब-सुख के योग; वाणी से मान बढ़ेगा।
सिंह1 (देह व स्वभाव)मध्यम — मिश्रित फल — स्वास्थ्य व स्वभाव में उतार-चढ़ाव; संयम से आरंभ करें।
कन्या12 (व्यय व मोक्ष)सावधानी — व्यय-भाव का कठिन गोचर — अपव्यय, विवाद व अनिद्रा से बचें; दान-पुण्य करें।
तुला11 (लाभ व इच्छापूर्ति)शुभ — लाभ-भाव का श्रेष्ठ गोचर — आय, इच्छापूर्ति व मित्र-सुख।
वृश्चिक10 (कर्म व पद)मध्यम — कार्यक्षेत्र में परिश्रम अधिक, फल सामान्य; कर्तव्य-निष्ठा बनाए रखें।
धनु9 (भाग्य व धर्म)शुभ — भाग्योदय का काल — धर्म-कार्य, गुरु-कृपा व दीर्घ योजनाएँ फलेंगी।
मकर8 (आयु व गूढ़ बाधा)सावधानी — अष्टम गोचर — स्वास्थ्य, अपयश व अचानक बाधा से सावधान; आराधना विशेष फलदायी।
कुम्भ7 (दांपत्य व साझेदारी)शुभ — दांपत्य व साझेदारी में मधुरता; अनुबंध व मांगलिक कार्यों के शुभ योग।
मीन6 (रोग-ऋण-शत्रु)मध्यम — विरोधियों से सजग रहें; दिनचर्या व आहार संयमित रखें।

यह फल कैसे निकाला जाता है

शास्त्र में गोचर-फल चन्द्र-राशि (जन्म राशि) से गिना जाता है — ग्रह आपकी राशि से कौन-से भाव में जा रहा है, यही फल तय करता है। गुरु के लिए चन्द्र-राशि से 2, 5, 7, 9, 11 भाव शुभ माने गए हैं (बृहत्संहिता का गोचर अध्याय), शेष भाव मध्यम अथवा सावधानी के। इस पृष्ठ की गणना ग्रह की वास्तविक खगोलीय स्थिति (निरयन/लाहिरी) पर आधारित है — तिथियाँ अनुमान नहीं, गणना हैं।

उपाय, मंत्र व दान

गुरुवार को गुरु-पूजन, पीत वस्त्र व चने की दाल का दान।

गुरु बीज मंत्र — ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः (प्रतिदिन 108 बार जप)।

दान: चने की दाल, पीत वस्त्र, हल्दी व केला का दान गुरुवार को करना शास्त्र-सम्मत है।

उपाय का उद्देश्य ग्रह को "टालना" नहीं, अपने कर्म व मन को उस ऊर्जा के अनुकूल बनाना है — इसीलिए जप, दान व सेवा तीनों साथ कहे गए हैं।

व्यक्तिगत फल

यह फल चन्द्र-राशि आधारित सामान्य शास्त्रीय संकेत है। आपकी जन्म-कुंडली में गुरु किस भाव के स्वामी हैं, किस दशा-अंतर्दशा में हैं, और उन पर किसकी दृष्टि है — इन तीनों से वास्तविक फल बदल जाता है। व्यक्तिगत विश्लेषण हेतु ज्योतिष आचार्य से पूछें; पहला प्रश्न निःशुल्क है।