आर्द्रा नक्षत्र
Ardra · स्वामी राहु
नक्षत्र परिचय
| नक्षत्र | आर्द्रा (Ardra) |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | राहु |
| देवता | रुद्र |
| प्रतीक | अश्रु-बिन्दु |
| गण | मनुष्य |
| नाड़ी | आदि |
| योनि | श्वान |
| राशि | मिथुन |
| विस्तार | मिथुन 6°40' – मिथुन 19°59' |
चरण व नवांश
| 1 चरण | नवांश राशि — धनु |
|---|---|
| 2 चरण | नवांश राशि — मकर |
| 3 चरण | नवांश राशि — कुम्भ |
| 4 चरण | नवांश राशि — मीन |
स्वामी राहु की वर्तमान स्थिति
राहु इस समय कुम्भ राशि में (वक्री) हैं, और 5 दिस॰ 2026 को मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
विंशोत्तरी पद्धति में राहु की महादशा 18 वर्ष की होती है — जिस जातक का जन्म आर्द्रा नक्षत्र में हुआ हो, उसका जीवन इसी महादशा से आरंभ होता है।
चन्द्रमा आर्द्रा नक्षत्र में कब
चन्द्रमा अगली बार आर्द्रा नक्षत्र में शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को आएगा।
चन्द्रमा लगभग सवा दो दिन एक नक्षत्र में रहता है और 27 नक्षत्रों का चक्र लगभग 27 दिन में पूरा करता है — इसी से पंचांग का दैनिक नक्षत्र तय होता है। गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से।
संबंधित
मंत्र
आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं। इनका बीज मंत्र — ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (108 बार जप)।
विवाह-मिलान में महत्व
गुण-मिलान (अष्टकूट) में नक्षत्र से ही तारा, योनि, गण व नाड़ी कूट निर्धारित होते हैं। आर्द्रा की नाड़ी आदि व गण मनुष्य है — समान नाड़ी वाले नक्षत्र से मिलान में नाड़ी दोष बनता है।