आश्लेषा नक्षत्र
Ashlesha · स्वामी बुध
नक्षत्र परिचय
| नक्षत्र | आश्लेषा (Ashlesha) |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | बुध |
| देवता | सर्प (नाग) |
| प्रतीक | चक्राकार सर्प |
| गण | राक्षस |
| नाड़ी | अन्त्य |
| योनि | मार्जार |
| राशि | कर्क |
| विस्तार | कर्क 16°40' – कर्क 29°59' |
चरण व नवांश
| 1 चरण | नवांश राशि — धनु |
|---|---|
| 2 चरण | नवांश राशि — मकर |
| 3 चरण | नवांश राशि — कुम्भ |
| 4 चरण | नवांश राशि — मीन |
स्वामी बुध की वर्तमान स्थिति
बुध इस समय तुला राशि में हैं, और 2 दिस॰ 2026 को वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।
विंशोत्तरी पद्धति में बुध की महादशा 17 वर्ष की होती है — जिस जातक का जन्म आश्लेषा नक्षत्र में हुआ हो, उसका जीवन इसी महादशा से आरंभ होता है।
चन्द्रमा आश्लेषा नक्षत्र में कब
चन्द्रमा अगली बार आश्लेषा नक्षत्र में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को आएगा।
चन्द्रमा लगभग सवा दो दिन एक नक्षत्र में रहता है और 27 नक्षत्रों का चक्र लगभग 27 दिन में पूरा करता है — इसी से पंचांग का दैनिक नक्षत्र तय होता है। गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से।
संबंधित
मंत्र
आश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध हैं। इनका बीज मंत्र — ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः (108 बार जप)।
विवाह-मिलान में महत्व
गुण-मिलान (अष्टकूट) में नक्षत्र से ही तारा, योनि, गण व नाड़ी कूट निर्धारित होते हैं। आश्लेषा की नाड़ी अन्त्य व गण राक्षस है — समान नाड़ी वाले नक्षत्र से मिलान में नाड़ी दोष बनता है।