भरणी नक्षत्र
Bharani · स्वामी शुक्र
नक्षत्र परिचय
| नक्षत्र | भरणी (Bharani) |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | शुक्र |
| देवता | यम |
| प्रतीक | योनि |
| गण | मनुष्य |
| नाड़ी | मध्य |
| योनि | गज |
| राशि | मेष |
| विस्तार | मेष 13°20' – मेष 26°39' |
चरण व नवांश
| 1 चरण | नवांश राशि — सिंह |
|---|---|
| 2 चरण | नवांश राशि — कन्या |
| 3 चरण | नवांश राशि — तुला |
| 4 चरण | नवांश राशि — वृश्चिक |
मंत्र
भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र हैं। इनका बीज मंत्र — ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (108 बार जप)।
विवाह-मिलान में महत्व
गुण-मिलान (अष्टकूट) में नक्षत्र से ही तारा, योनि, गण व नाड़ी कूट निर्धारित होते हैं। भरणी की नाड़ी मध्य व गण मनुष्य है — समान नाड़ी वाले नक्षत्र से मिलान में नाड़ी दोष बनता है।