धनिष्ठा नक्षत्र

Dhanishtha · स्वामी मंगल

नक्षत्र परिचय

नक्षत्रधनिष्ठा (Dhanishtha)
स्वामी ग्रहमंगल
देवताअष्ट वसु
प्रतीकमृदंग
गणराक्षस
नाड़ीमध्य
योनिसिंह
राशिमकर, कुम्भ
विस्तारमकर 23°20' – कुम्भ 6°39'

चरण व नवांश

1 चरणनवांश राशि — सिंह
2 चरणनवांश राशि — कन्या
3 चरणनवांश राशि — तुला
4 चरणनवांश राशि — वृश्चिक

स्वामी मंगल की वर्तमान स्थिति

मंगल इस समय कर्क राशि में हैं, और 12 नव॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

विंशोत्तरी पद्धति में मंगल की महादशा 7 वर्ष की होती है — जिस जातक का जन्म धनिष्ठा नक्षत्र में हुआ हो, उसका जीवन इसी महादशा से आरंभ होता है।

चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में कब

चन्द्रमा अगली बार धनिष्ठा नक्षत्र में मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को आएगा।

चन्द्रमा लगभग सवा दो दिन एक नक्षत्र में रहता है और 27 नक्षत्रों का चक्र लगभग 27 दिन में पूरा करता है — इसी से पंचांग का दैनिक नक्षत्र तय होता है। गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से।

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मंत्र

धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं। इनका बीज मंत्र — ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः (108 बार जप)।

विवाह-मिलान में महत्व

गुण-मिलान (अष्टकूट) में नक्षत्र से ही तारा, योनि, गण व नाड़ी कूट निर्धारित होते हैं। धनिष्ठा की नाड़ी मध्य व गण राक्षस है — समान नाड़ी वाले नक्षत्र से मिलान में नाड़ी दोष बनता है।