ज्येष्ठा नक्षत्र
Jyeshtha · स्वामी बुध
नक्षत्र परिचय
| नक्षत्र | ज्येष्ठा (Jyeshtha) |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | बुध |
| देवता | इन्द्र |
| प्रतीक | कुण्डल / छत्र |
| गण | राक्षस |
| नाड़ी | आदि |
| योनि | मृग |
| राशि | वृश्चिक |
| विस्तार | वृश्चिक 16°40' – वृश्चिक 29°59' |
चरण व नवांश
| 1 चरण | नवांश राशि — धनु |
|---|---|
| 2 चरण | नवांश राशि — मकर |
| 3 चरण | नवांश राशि — कुम्भ |
| 4 चरण | नवांश राशि — मीन |
मंत्र
ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध हैं। इनका बीज मंत्र — ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः (108 बार जप)।
विवाह-मिलान में महत्व
गुण-मिलान (अष्टकूट) में नक्षत्र से ही तारा, योनि, गण व नाड़ी कूट निर्धारित होते हैं। ज्येष्ठा की नाड़ी आदि व गण राक्षस है — समान नाड़ी वाले नक्षत्र से मिलान में नाड़ी दोष बनता है।