मघा नक्षत्र
Magha · स्वामी केतु
नक्षत्र परिचय
| नक्षत्र | मघा (Magha) |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | केतु |
| देवता | पितृगण |
| प्रतीक | राज-सिंहासन |
| गण | राक्षस |
| नाड़ी | अन्त्य |
| योनि | मूषक |
| राशि | सिंह |
| विस्तार | सिंह 0°00' – सिंह 13°19' |
चरण व नवांश
| 1 चरण | नवांश राशि — मेष |
|---|---|
| 2 चरण | नवांश राशि — वृषभ |
| 3 चरण | नवांश राशि — मिथुन |
| 4 चरण | नवांश राशि — कर्क |
स्वामी केतु की वर्तमान स्थिति
केतु इस समय सिंह राशि में (वक्री) हैं, और 5 दिस॰ 2026 को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।
विंशोत्तरी पद्धति में केतु की महादशा 7 वर्ष की होती है — जिस जातक का जन्म मघा नक्षत्र में हुआ हो, उसका जीवन इसी महादशा से आरंभ होता है।
चन्द्रमा मघा नक्षत्र में कब
चन्द्रमा अगली बार मघा नक्षत्र में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को आएगा।
चन्द्रमा लगभग सवा दो दिन एक नक्षत्र में रहता है और 27 नक्षत्रों का चक्र लगभग 27 दिन में पूरा करता है — इसी से पंचांग का दैनिक नक्षत्र तय होता है। गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से।
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मंत्र
मघा नक्षत्र के स्वामी केतु हैं। इनका बीज मंत्र — ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः (108 बार जप)।
विवाह-मिलान में महत्व
गुण-मिलान (अष्टकूट) में नक्षत्र से ही तारा, योनि, गण व नाड़ी कूट निर्धारित होते हैं। मघा की नाड़ी अन्त्य व गण राक्षस है — समान नाड़ी वाले नक्षत्र से मिलान में नाड़ी दोष बनता है।