पुष्य नक्षत्र

Pushya · स्वामी शनि

नक्षत्र परिचय

नक्षत्रपुष्य (Pushya)
स्वामी ग्रहशनि
देवताबृहस्पति
प्रतीकपुष्प / गो-स्तन
गणदेव
नाड़ीमध्य
योनिमेष
राशिकर्क
विस्तारकर्क 3°20' – कर्क 16°39'

चरण व नवांश

1 चरणनवांश राशि — सिंह
2 चरणनवांश राशि — कन्या
3 चरणनवांश राशि — तुला
4 चरणनवांश राशि — वृश्चिक

स्वामी शनि की वर्तमान स्थिति

शनि इस समय मीन राशि में (वक्री) हैं, और 3 जून 2027 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे।

विंशोत्तरी पद्धति में शनि की महादशा 19 वर्ष की होती है — जिस जातक का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ हो, उसका जीवन इसी महादशा से आरंभ होता है।

चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में कब

चन्द्रमा अगली बार पुष्य नक्षत्र में रविवार, 1 नवंबर 2026 को आएगा।

चन्द्रमा लगभग सवा दो दिन एक नक्षत्र में रहता है और 27 नक्षत्रों का चक्र लगभग 27 दिन में पूरा करता है — इसी से पंचांग का दैनिक नक्षत्र तय होता है। गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से।

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मंत्र

पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं। इनका बीज मंत्र — ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः (108 बार जप)।

विवाह-मिलान में महत्व

गुण-मिलान (अष्टकूट) में नक्षत्र से ही तारा, योनि, गण व नाड़ी कूट निर्धारित होते हैं। पुष्य की नाड़ी मध्य व गण देव है — समान नाड़ी वाले नक्षत्र से मिलान में नाड़ी दोष बनता है।