शतभिषा नक्षत्र
Shatabhisha · स्वामी राहु
नक्षत्र परिचय
| नक्षत्र | शतभिषा (Shatabhisha) |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | राहु |
| देवता | वरुण |
| प्रतीक | रिक्त वृत्त |
| गण | राक्षस |
| नाड़ी | आदि |
| योनि | अश्व |
| राशि | कुम्भ |
| विस्तार | कुम्भ 6°40' – कुम्भ 19°59' |
चरण व नवांश
| 1 चरण | नवांश राशि — धनु |
|---|---|
| 2 चरण | नवांश राशि — मकर |
| 3 चरण | नवांश राशि — कुम्भ |
| 4 चरण | नवांश राशि — मीन |
मंत्र
शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं। इनका बीज मंत्र — ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (108 बार जप)।
विवाह-मिलान में महत्व
गुण-मिलान (अष्टकूट) में नक्षत्र से ही तारा, योनि, गण व नाड़ी कूट निर्धारित होते हैं। शतभिषा की नाड़ी आदि व गण राक्षस है — समान नाड़ी वाले नक्षत्र से मिलान में नाड़ी दोष बनता है।