उत्तराभाद्रपद नक्षत्र
Uttara Bhadrapada · स्वामी शनि
नक्षत्र परिचय
| नक्षत्र | उत्तराभाद्रपद (Uttara Bhadrapada) |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | शनि |
| देवता | अहिर्बुध्न्य |
| प्रतीक | जुड़वाँ पद |
| गण | मनुष्य |
| नाड़ी | मध्य |
| योनि | गौ |
| राशि | मीन |
| विस्तार | मीन 3°20' – मीन 16°39' |
चरण व नवांश
| 1 चरण | नवांश राशि — सिंह |
|---|---|
| 2 चरण | नवांश राशि — कन्या |
| 3 चरण | नवांश राशि — तुला |
| 4 चरण | नवांश राशि — वृश्चिक |
मंत्र
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनि हैं। इनका बीज मंत्र — ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः (108 बार जप)।
विवाह-मिलान में महत्व
गुण-मिलान (अष्टकूट) में नक्षत्र से ही तारा, योनि, गण व नाड़ी कूट निर्धारित होते हैं। उत्तराभाद्रपद की नाड़ी मध्य व गण मनुष्य है — समान नाड़ी वाले नक्षत्र से मिलान में नाड़ी दोष बनता है।