सूर्य महादशा — 6 वर्ष
विंशोत्तरी पद्धति · Surya (Sun)
सूर्य महादशा क्या है
विंशोत्तरी पद्धति में सूर्य की महादशा 6 वर्ष की होती है (कुल 120 वर्ष के चक्र में)। सूर्य क्रूर (पाप) ग्रह — पर आत्म-बल व अधिकार का दाता हैं और शास्त्र में इन्हें आत्मा, पिता, पद-प्रतिष्ठा, राज-कृपा, आरोग्य व नेतृत्व का कारक कहा गया है — इसी कारण इस महादशा में प्रायः यही विषय जीवन के केंद्र में आते हैं।
ध्यान रहे — महादशा स्वयं शुभ या अशुभ नहीं होती। सूर्य आपकी कुंडली में किन भावों के स्वामी हैं, कितने बलवान हैं और उन पर किसकी दृष्टि है, फल उसी से तय होता है।
सूर्य महादशा किसे मिलती है
जिस जातक का जन्म-नक्षत्र इन तीन में से कोई हो, उसका जीवन सूर्य की महादशा से आरंभ होता है —
अन्य जातकों को यह महादशा विंशोत्तरी क्रम में अपने समय पर आती है।
सूर्य महादशा में अन्तर्दशा की अवधि
| अन्तर्दशा | अवधि |
|---|---|
| सूर्य | 4 माह |
| चन्द्र | 6 माह |
| मंगल | 4 माह |
| राहु | 11 माह |
| गुरु | 10 माह |
| शनि | 11 माह |
| बुध | 10 माह |
| केतु | 4 माह |
| शुक्र | 1 वर्ष 0 माह |
गणना — (महादशा के 6 वर्ष × अन्तर्दशा-स्वामी के वर्ष) ÷ 120। क्रम सूर्य से ही आरंभ होता है।
सूर्य महादशा के उपाय
सूर्य बीज मंत्र — ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः (प्रतिदिन 108 बार जप)।
रविवार को सूर्य को जल-अर्घ्य व आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ।
दान: गेहूँ, गुड़, तांबा व लाल वस्त्र — रविवार को।
उपाय का उद्देश्य दशा को टालना नहीं, उसके स्वभाव के अनुकूल कर्म करना है।
अपनी दशा जानें
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