बुध महादशा — 17 वर्ष
विंशोत्तरी पद्धति · Budh (Mercury)
बुध महादशा क्या है
विंशोत्तरी पद्धति में बुध की महादशा 17 वर्ष की होती है (कुल 120 वर्ष के चक्र में)। बुध सम ग्रह — जिस संगति में हो वैसा फल देता है हैं और शास्त्र में इन्हें बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, लेखन व संचार का कारक कहा गया है — इसी कारण इस महादशा में प्रायः यही विषय जीवन के केंद्र में आते हैं।
ध्यान रहे — महादशा स्वयं शुभ या अशुभ नहीं होती। बुध आपकी कुंडली में किन भावों के स्वामी हैं, कितने बलवान हैं और उन पर किसकी दृष्टि है, फल उसी से तय होता है।
बुध महादशा किसे मिलती है
जिस जातक का जन्म-नक्षत्र इन तीन में से कोई हो, उसका जीवन बुध की महादशा से आरंभ होता है —
अन्य जातकों को यह महादशा विंशोत्तरी क्रम में अपने समय पर आती है।
बुध महादशा में अन्तर्दशा की अवधि
| अन्तर्दशा | अवधि |
|---|---|
| बुध | 2 वर्ष 5 माह |
| केतु | 12 माह |
| शुक्र | 2 वर्ष 10 माह |
| सूर्य | 10 माह |
| चन्द्र | 1 वर्ष 5 माह |
| मंगल | 12 माह |
| राहु | 2 वर्ष 7 माह |
| गुरु | 2 वर्ष 3 माह |
| शनि | 2 वर्ष 8 माह |
गणना — (महादशा के 17 वर्ष × अन्तर्दशा-स्वामी के वर्ष) ÷ 120। क्रम बुध से ही आरंभ होता है।
बुध महादशा के उपाय
बुध बीज मंत्र — ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः (प्रतिदिन 108 बार जप)।
बुधवार को गणेश-वंदना व हरी वस्तुओं (मूँग) का दान।
दान: मूँग, हरे वस्त्र व कांस्य — बुधवार को।
उपाय का उद्देश्य दशा को टालना नहीं, उसके स्वभाव के अनुकूल कर्म करना है।
अपनी दशा जानें
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