चन्द्र महादशा — 10 वर्ष

विंशोत्तरी पद्धति · Chandra (Moon)

चन्द्र महादशा क्या है

विंशोत्तरी पद्धति में चन्द्र की महादशा 10 वर्ष की होती है (कुल 120 वर्ष के चक्र में)। चन्द्र शुभ ग्रह (पक्ष-बल पर निर्भर) हैं और शास्त्र में इन्हें मन, माता, भावनाएँ, जल-तत्व व लोक-प्रियता का कारक कहा गया है — इसी कारण इस महादशा में प्रायः यही विषय जीवन के केंद्र में आते हैं।

ध्यान रहे — महादशा स्वयं शुभ या अशुभ नहीं होती। चन्द्र आपकी कुंडली में किन भावों के स्वामी हैं, कितने बलवान हैं और उन पर किसकी दृष्टि है, फल उसी से तय होता है।

चन्द्र महादशा किसे मिलती है

जिस जातक का जन्म-नक्षत्र इन तीन में से कोई हो, उसका जीवन चन्द्र की महादशा से आरंभ होता है —

अन्य जातकों को यह महादशा विंशोत्तरी क्रम में अपने समय पर आती है।

चन्द्र महादशा में अन्तर्दशा की अवधि

अन्तर्दशाअवधि
चन्द्र10 माह
मंगल7 माह
राहु1 वर्ष 6 माह
गुरु1 वर्ष 4 माह
शनि1 वर्ष 7 माह
बुध1 वर्ष 5 माह
केतु7 माह
शुक्र1 वर्ष 8 माह
सूर्य6 माह

गणना — (महादशा के 10 वर्ष × अन्तर्दशा-स्वामी के वर्ष) ÷ 120। क्रम चन्द्र से ही आरंभ होता है।

चन्द्र महादशा के उपाय

चन्द्र बीज मंत्र — ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः (प्रतिदिन 108 बार जप)।

दान: दूध, चावल, श्वेत वस्त्र व चाँदी — सोमवार को।

उपाय का उद्देश्य दशा को टालना नहीं, उसके स्वभाव के अनुकूल कर्म करना है।

अपनी दशा जानें

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