केतु महादशा — 7 वर्ष
विंशोत्तरी पद्धति · Ketu
केतु महादशा क्या है
विंशोत्तरी पद्धति में केतु की महादशा 7 वर्ष की होती है (कुल 120 वर्ष के चक्र में)। केतु छाया ग्रह — सांसारिक में कमी, आध्यात्मिक में वृद्धि हैं और शास्त्र में इन्हें मोक्ष, वैराग्य, गूढ़ विद्या, अचानक हानि व आध्यात्मिक उन्नति का कारक कहा गया है — इसी कारण इस महादशा में प्रायः यही विषय जीवन के केंद्र में आते हैं।
ध्यान रहे — महादशा स्वयं शुभ या अशुभ नहीं होती। केतु आपकी कुंडली में किन भावों के स्वामी हैं, कितने बलवान हैं और उन पर किसकी दृष्टि है, फल उसी से तय होता है।
केतु महादशा किसे मिलती है
जिस जातक का जन्म-नक्षत्र इन तीन में से कोई हो, उसका जीवन केतु की महादशा से आरंभ होता है —
अन्य जातकों को यह महादशा विंशोत्तरी क्रम में अपने समय पर आती है।
केतु महादशा में अन्तर्दशा की अवधि
| अन्तर्दशा | अवधि |
|---|---|
| केतु | 5 माह |
| शुक्र | 1 वर्ष 2 माह |
| सूर्य | 4 माह |
| चन्द्र | 7 माह |
| मंगल | 5 माह |
| राहु | 1 वर्ष 1 माह |
| गुरु | 11 माह |
| शनि | 1 वर्ष 1 माह |
| बुध | 12 माह |
गणना — (महादशा के 7 वर्ष × अन्तर्दशा-स्वामी के वर्ष) ÷ 120। क्रम केतु से ही आरंभ होता है।
केतु महादशा के उपाय
केतु बीज मंत्र — ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः (प्रतिदिन 108 बार जप)।
गणपति-उपासना व कंबल का दान।
दान: कंबल, तिल व सप्तधान्य — मंगलवार को।
उपाय का उद्देश्य दशा को टालना नहीं, उसके स्वभाव के अनुकूल कर्म करना है।
अपनी दशा जानें
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