शनि महादशा — 19 वर्ष

विंशोत्तरी पद्धति · Shani (Saturn)

शनि महादशा क्या है

विंशोत्तरी पद्धति में शनि की महादशा 19 वर्ष की होती है (कुल 120 वर्ष के चक्र में)। शनि क्रूर (पाप) ग्रह — पर परिश्रम का सबसे बड़ा न्यायाधीश हैं और शास्त्र में इन्हें आयु, कर्म, सेवा, अनुशासन, विलंब व वैराग्य का कारक कहा गया है — इसी कारण इस महादशा में प्रायः यही विषय जीवन के केंद्र में आते हैं।

ध्यान रहे — महादशा स्वयं शुभ या अशुभ नहीं होती। शनि आपकी कुंडली में किन भावों के स्वामी हैं, कितने बलवान हैं और उन पर किसकी दृष्टि है, फल उसी से तय होता है।

शनि महादशा किसे मिलती है

जिस जातक का जन्म-नक्षत्र इन तीन में से कोई हो, उसका जीवन शनि की महादशा से आरंभ होता है —

अन्य जातकों को यह महादशा विंशोत्तरी क्रम में अपने समय पर आती है।

शनि महादशा में अन्तर्दशा की अवधि

अन्तर्दशाअवधि
शनि3 वर्ष 0 माह
बुध2 वर्ष 8 माह
केतु1 वर्ष 1 माह
शुक्र3 वर्ष 2 माह
सूर्य11 माह
चन्द्र1 वर्ष 7 माह
मंगल1 वर्ष 1 माह
राहु2 वर्ष 10 माह
गुरु2 वर्ष 6 माह

गणना — (महादशा के 19 वर्ष × अन्तर्दशा-स्वामी के वर्ष) ÷ 120। क्रम शनि से ही आरंभ होता है।

शनि महादशा के उपाय

शनि बीज मंत्र — ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः (प्रतिदिन 108 बार जप)।

शनिवार को तिल-तेल का दान व हनुमान चालीसा का पाठ।

दान: तिल, तेल, उड़द, लोहा व काले वस्त्र — शनिवार को।

उपाय का उद्देश्य दशा को टालना नहीं, उसके स्वभाव के अनुकूल कर्म करना है।

अपनी दशा जानें

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