शुक्र महादशा — 20 वर्ष
विंशोत्तरी पद्धति · Shukra (Venus)
शुक्र महादशा क्या है
विंशोत्तरी पद्धति में शुक्र की महादशा 20 वर्ष की होती है (कुल 120 वर्ष के चक्र में)। शुक्र शुभ ग्रह — सुख व रस का कारक हैं और शास्त्र में इन्हें दांपत्य, सौंदर्य, कला, वाहन, सुख-सुविधा व भोग का कारक कहा गया है — इसी कारण इस महादशा में प्रायः यही विषय जीवन के केंद्र में आते हैं।
ध्यान रहे — महादशा स्वयं शुभ या अशुभ नहीं होती। शुक्र आपकी कुंडली में किन भावों के स्वामी हैं, कितने बलवान हैं और उन पर किसकी दृष्टि है, फल उसी से तय होता है।
शुक्र महादशा किसे मिलती है
जिस जातक का जन्म-नक्षत्र इन तीन में से कोई हो, उसका जीवन शुक्र की महादशा से आरंभ होता है —
अन्य जातकों को यह महादशा विंशोत्तरी क्रम में अपने समय पर आती है।
शुक्र महादशा में अन्तर्दशा की अवधि
| अन्तर्दशा | अवधि |
|---|---|
| शुक्र | 3 वर्ष 4 माह |
| सूर्य | 1 वर्ष 0 माह |
| चन्द्र | 1 वर्ष 8 माह |
| मंगल | 1 वर्ष 2 माह |
| राहु | 3 वर्ष 0 माह |
| गुरु | 2 वर्ष 8 माह |
| शनि | 3 वर्ष 2 माह |
| बुध | 2 वर्ष 10 माह |
| केतु | 1 वर्ष 2 माह |
गणना — (महादशा के 20 वर्ष × अन्तर्दशा-स्वामी के वर्ष) ÷ 120। क्रम शुक्र से ही आरंभ होता है।
शुक्र महादशा के उपाय
शुक्र बीज मंत्र — ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (प्रतिदिन 108 बार जप)।
शुक्रवार को माँ लक्ष्मी की आराधना व श्वेत वस्तुओं का दान।
दान: श्वेत वस्त्र, चावल, मिश्री व चाँदी — शुक्रवार को।
उपाय का उद्देश्य दशा को टालना नहीं, उसके स्वभाव के अनुकूल कर्म करना है।
अपनी दशा जानें
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