पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र

Purva Ashadha · स्वामी शुक्र

नक्षत्र परिचय

नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा (Purva Ashadha)
स्वामी ग्रहशुक्र
देवताआपः (जल)
प्रतीकहस्ति-दन्त
गणमनुष्य
नाड़ीमध्य
योनिवानर
राशिधनु
विस्तारधनु 13°20' – धनु 26°39'

चरण व नवांश

1 चरणनवांश राशि — सिंह
2 चरणनवांश राशि — कन्या
3 चरणनवांश राशि — तुला
4 चरणनवांश राशि — वृश्चिक

स्वामी शुक्र की वर्तमान स्थिति

शुक्र इस समय तुला राशि में (वक्री) हैं, और 6 नव॰ 2026 को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।

विंशोत्तरी पद्धति में शुक्र की महादशा 20 वर्ष की होती है — जिस जातक का जन्म पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में हुआ हो, उसका जीवन इसी महादशा से आरंभ होता है।

चन्द्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में कब

चन्द्रमा अगली बार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को आएगा।

चन्द्रमा लगभग सवा दो दिन एक नक्षत्र में रहता है और 27 नक्षत्रों का चक्र लगभग 27 दिन में पूरा करता है — इसी से पंचांग का दैनिक नक्षत्र तय होता है। गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से।

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मंत्र

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी शुक्र हैं। इनका बीज मंत्र — ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (108 बार जप)।

विवाह-मिलान में महत्व

गुण-मिलान (अष्टकूट) में नक्षत्र से ही तारा, योनि, गण व नाड़ी कूट निर्धारित होते हैं। पूर्वाषाढ़ा की नाड़ी मध्य व गण मनुष्य है — समान नाड़ी वाले नक्षत्र से मिलान में नाड़ी दोष बनता है।