बहुला चौथ 2027 — शुक्रवार, 20 अगस्त 2027

Bahula Chauth · भाद्रपद मास · 344 दिन बाद

बहुला चौथ 2027 कब है?

बहुला चौथ 2027 में शुक्रवार, 20 अगस्त 2027 को है — आज से 344 दिन बाद।

भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी — इसे बहुला चौथ, बहुरा चौथ, भादो की चौथ तथा गुजरात में बोल चोथ कहते हैं। गौ-वत्स (गाय व बछड़े) का पूजन कर संतान की कुशलता की कामना की जाती है; व्रत चन्द्रोदय पर अर्घ्य देकर खोला जाता है। यही दिन भाद्रपद की संकष्टी चतुर्थी भी है।

बहुला चौथ का महत्व

भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी — इसे बहुला चौथ, बहुरा चौथ, भादो की चौथ तथा गुजरात में बोल चोथ कहते हैं। गौ-वत्स (गाय व बछड़े) का पूजन कर संतान की कुशलता की कामना की जाती है; व्रत चन्द्रोदय पर अर्घ्य देकर खोला जाता है। यही दिन भाद्रपद की संकष्टी चतुर्थी भी है।

यह पर्व भाद्रपद मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (astronomy-engine + लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।

बहुला चौथ 2027 — पूजा का शुभ समय

सूर्योदय05:52
सूर्यास्त18:55
चन्द्रोदय (अर्घ्य व पारण)20:23
अभिजीत मुहूर्त11:58 – 12:50
ब्रह्म मुहूर्त04:16 – 05:04
राहुकाल (टालें)10:46 – 12:24
व्रत पारण05:53 के पश्चात् (21 अगस्त 2027)

समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है (astronomy-engine), किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई।

बहुला चौथ पूजा-विधि

  1. प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें — संतान की कुशलता व दीर्घायु की कामना से।
  2. गाय व बछड़े का पूजन करें; उन्हें रोली-अक्षत का तिलक कर हरा चारा व गुड़ खिलाएँ।
  3. दिन भर निराहार अथवा फलाहार रहें; इस दिन गाय का दूध व उससे बनी वस्तुएँ वर्जित मानी जाती हैं।
  4. संध्या में गणेश-पूजन कर बहुला गाय की कथा सुनें अथवा पढ़ें।
  5. चन्द्रोदय होने पर चन्द्रमा को अर्घ्य दें, तत्पश्चात् व्रत का पारण करें।

बहुला चौथ पूजा सामग्री

गाय व बछड़े हेतु हरा चारा, गुड़ व रोली-अक्षत; गणेश-पूजन हेतु दूर्वा, मोदक व लाल पुष्प; अर्घ्य हेतु जल-पात्र, दीपक, धूप तथा कथा-पुस्तक। भोग में भुने चने, बाजरा व सप्तधान्य की परम्परा है — इस दिन गाय के दूध, दही व घी का त्याग किया जाता है।

पूजा व मंत्र

गणेश की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ गं गणपतये नमः (108 बार जप)।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।

बहुला चौथ की कथा

पुराण-कथा के अनुसार बहुला नाम की एक गौ वन में चर रही थी कि एक सिंह ने उसे पकड़ लिया। बहुला ने प्रार्थना की कि उसका बछड़ा भूखा है — वह उसे दूध पिलाकर लौट आएगी। सिंह ने संदेह किया, पर बहुला ने वचन दिया और लौटकर स्वयं को प्रस्तुत कर दिया। उसके सत्य व वात्सल्य से प्रसन्न होकर सिंह ने उसे छोड़ दिया — कहा जाता है कि वह सिंह स्वयं भगवान की परीक्षा थी। तभी से भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी को गौ-वत्स का पूजन होता है, और माताएँ अपनी संतान की कुशलता हेतु यह व्रत रखती हैं।

बहुला चौथ — क्षेत्रीय परम्पराएँ

राजस्थान, मध्य प्रदेश व ब्रज में यह बहुला चौथ अथवा बहुरा चौथ कहलाती है और गौ-वत्स पूजन इसका केंद्र है। उत्तर प्रदेश के कई भागों में इसे भादो की चौथ अथवा भादवा की चौथ कहते हैं। गुजरात में यही दिन बोल चोथ है, जहाँ इस दिन चाकू-कैंची से कटी वस्तुएँ व गेहूँ नहीं खाए जाते। महाराष्ट्र व दक्षिण में यही तिथि भाद्रपद की संकष्टी चतुर्थी है, जिसमें गणेश-पूजन कर चन्द्रोदय पर अर्घ्य दिया जाता है — तिथि एक ही है, परम्परा अलग-अलग।

बहुला चौथ — आने वाले वर्षों की तिथियाँ

2026सोमवार, 31 अगस्त 2026
2027शुक्रवार, 20 अगस्त 2027
2028बुधवार, 9 अगस्त 2028
2029सोमवार, 27 अगस्त 2029
2030शुक्रवार, 16 अगस्त 2030

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