छठ पूजा 2026 — रविवार, 15 नवंबर 2026

Chhath Puja · कार्तिक मास · 89 दिन बाद

छठ पूजा 2026 कब है?

छठ पूजा 2026 में रविवार, 15 नवंबर 2026 को है — आज से 89 दिन बाद।

कार्तिक शुक्ल षष्ठी — सूर्य व छठी मैया की उपासना; अस्ताचल व उदयाचल सूर्य को अर्घ्य।

छठ पूजा का महत्व

कार्तिक शुक्ल षष्ठी — सूर्य व छठी मैया की उपासना; अस्ताचल व उदयाचल सूर्य को अर्घ्य।

यह पर्व कार्तिक मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (astronomy-engine + लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।

छठ पूजा 2026 — पूजा का शुभ समय

सूर्योदय06:43
सूर्यास्त17:27
प्रदोष काल (पूजा)17:27 – 19:51
अभिजीत मुहूर्त11:44 – 12:27
ब्रह्म मुहूर्त05:07 – 05:55
राहुकाल (टालें)16:07 – 17:27
व्रत पारण06:44 के पश्चात् (16 नवंबर 2026)

समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है (astronomy-engine), किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई।

छठ पूजा पूजा-विधि

  1. पहला दिन 'नहाय-खाय' — स्नान कर सात्त्विक भोजन ग्रहण करें।
  2. दूसरा दिन 'खरना' — गुड़ की खीर का प्रसाद, फिर लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ।
  3. तीसरे दिन सायंकाल अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को नदी/जल में खड़े होकर अर्घ्य दें।
  4. चौथे दिन उदयाचल (उगते) सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
  5. 'ॐ घृणिः सूर्याय नमः' का जप कर छठी मैया की आराधना करें।

छठ पूजा पूजा सामग्री

बाँस के सूप व डलिया, ठेकुआ, गन्ना, नारियल, केला, अक्षत, सिंदूर, दीप, दूध, जल

छठ पूजा व्रत के नियम व विधि

यह चार दिन का कठिन व्रत है — नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य व उषा अर्घ्य। खरना के पश्चात् लगभग छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत रहता है। अर्घ्य जल में खड़े होकर सूर्य को दिया जाता है, और उषा अर्घ्य के पश्चात् ही पारण होता है।

पूजा व मंत्र

सूर्य की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ घृणिः सूर्याय नमः (108 बार जप)।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।

छठ पूजा की कथा

छठ पर्व भगवान सूर्य व उनकी शक्ति षष्ठी देवी (छठी मैया) की उपासना है; संतान-सुख, आरोग्य व परिवार की समृद्धि हेतु व्रती अस्ताचल व उदयाचल सूर्य को जल में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं।

छठ पूजा — क्षेत्रीय परम्पराएँ

बिहार, झारखंड व पूर्वी उत्तर प्रदेश का यह महापर्व अब देश भर में फैल चुका है। नदी व तालाब के घाटों पर सामूहिक अर्घ्य, ठेकुआ प्रसाद व दौरा (बाँस की डलिया) इसकी विशिष्ट पहचान हैं।

छठ पूजा — आने वाले वर्षों की तिथियाँ

2025सोमवार, 27 अक्टूबर 2025
2026रविवार, 15 नवंबर 2026
2027गुरुवार, 4 नवंबर 2027
2028सोमवार, 23 अक्टूबर 2028
2029रविवार, 11 नवंबर 2029

संबंधित