देवउठनी एकादशी 2027 — बुधवार, 10 नवंबर 2027
Dev Uthani Ekadashi · कार्तिक मास · 449 दिन बाद
देवउठनी एकादशी 2027 कब है?
देवउठनी एकादशी 2027 में बुधवार, 10 नवंबर 2027 को है — आज से 449 दिन बाद।
कार्तिक शुक्ल एकादशी — विष्णु का योगनिद्रा से जागरण; इसी दिन से मांगलिक कार्य पुनः आरंभ होते हैं।
देवउठनी एकादशी का महत्व
कार्तिक शुक्ल एकादशी — विष्णु का योगनिद्रा से जागरण; इसी दिन से मांगलिक कार्य पुनः आरंभ होते हैं।
यह पर्व कार्तिक मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (astronomy-engine + लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।
देवउठनी एकादशी 2027 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 06:39 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:30 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:03 – 05:51 |
| राहुकाल (टालें) | 12:04 – 13:26 |
| व्रत पारण | 06:40 के पश्चात् (11 नवंबर 2027) |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है (astronomy-engine), किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई।
देवउठनी एकादशी पूजा-विधि
- प्रातः स्नान कर घर-आँगन में रंगोली बनाएँ।
- सायंकाल भगवान विष्णु का शालिग्राम रूप में पूजन करें।
- गन्ना, सिंघाड़ा, आँवला व ऋतुफल अर्पित करें।
- शंख-घंटी बजाकर 'उठो देव' कहकर विष्णु को योगनिद्रा से जगाएँ।
- तुलसी-शालिग्राम विवाह करें; इसी दिन से मांगलिक कार्य पुनः आरंभ होते हैं।
देवउठनी एकादशी पूजा सामग्री
शालिग्राम/विष्णु मूर्ति, तुलसी, गन्ना, सिंघाड़ा, आँवला, ऋतुफल, दीप, गेरू, धूप
देवउठनी एकादशी व्रत के नियम व विधि
इसी दिन भगवान विष्णु चातुर्मास की निद्रा से जागते हैं और मांगलिक कार्य पुनः आरंभ होते हैं। तुलसी-शालिग्राम विवाह इसी संध्या को सम्पन्न किया जाता है। व्रत में अन्न वर्जित है; पारण द्वादशी को सूर्योदय के पश्चात्।
पूजा व मंत्र
विष्णु की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (108 बार जप)।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।
देवउठनी एकादशी — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2026 | शनिवार, 21 नवंबर 2026 |
|---|---|
| 2027 | बुधवार, 10 नवंबर 2027 |
| 2028 | शनिवार, 28 अक्टूबर 2028 |
| 2029 | शुक्रवार, 16 नवंबर 2029 |
| 2030 | मंगलवार, 5 नवंबर 2030 |