दशहरा (विजयादशमी) 2026 — मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
Dussehra · आश्विन मास · 11 दिन बाद
दशहरा (विजयादशमी) 2026 कब है?
दशहरा (विजयादशमी) 2026 में मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को है — आज से 11 दिन बाद।
आश्विन शुक्ल दशमी — रावण-वध की स्मृति; शस्त्र-पूजा व अपराह्न काल में विजय-मुहूर्त।
दशहरा (विजयादशमी) का महत्व
आश्विन शुक्ल दशमी — रावण-वध की स्मृति; शस्त्र-पूजा व अपराह्न काल में विजय-मुहूर्त।
यह पर्व आश्विन मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।
दशहरा (विजयादशमी) 2026 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 06:24 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:46 |
| अपराह्न काल (पूजा) | 13:13 – 15:30 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:43 – 12:28 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:48 – 05:36 |
| राहुकाल (टालें) | 14:56 – 16:21 |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है, किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई — और प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँची गई है (गणना-सत्यापित)।
दशहरा (विजयादशमी) पूजा-विधि
- प्रातः स्नान कर अपराह्न (विजय मुहूर्त) में पूजा करें।
- शमी वृक्ष, शस्त्र व वाहन का पूजन करें।
- अपराजिता देवी व श्रीराम का स्मरण कर 'श्री राम जय राम' जप करें।
- रावण-दहन के दर्शन करें व बड़ों का आशीर्वाद लें।
- इस दिन कोई भी नया शुभ कार्य आरंभ करना श्रेष्ठ माना गया है।
दशहरा (विजयादशमी) पूजा सामग्री
शमी पत्र, अक्षत, रोली, पुष्प, दीप, गुड़, धूप
दशहरा (विजयादशमी) — क्या करें, क्या न करें
विजयादशमी अपराह्न-व्यापिनी है — शस्त्र-पूजा, वाहन-पूजा, शमी-पूजन व नए कार्य का आरंभ इसी काल में श्रेष्ठ माना गया है। यह दिन अबूझ मुहूर्त माना जाता है, अतः विद्यारंभ, व्यापार-आरंभ व गृह-प्रवेश के लिए शुभ है। रावण-दहन के बाद शमी (या अपराजिता) के पत्ते बाँटने की परम्परा है। इस दिन क्रोध, विवाद व अपशब्द से बचने को कहा गया है — पर्व का भाव ही अहंकार-दहन है।
पूजा व मंत्र
राम की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — श्री राम जय राम जय जय राम (108 बार जप)।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।
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दशहरा (विजयादशमी) की कथा
विजयादशमी दो विजय-गाथाओं का संगम है। रामायण की परम्परा में इसी दिन श्रीराम ने रावण का वध किया — वह रावण जो वेद-वेत्ता व महाबली था, पर जिसके अहंकार ने उसे परायी स्त्री के हरण तक पहुँचा दिया। इसीलिए रावण-दहन केवल शत्रु का नहीं, अपने भीतर के अहंकार का दहन माना जाता है। दूसरी परम्परा शाक्त है: नौ रात्रि के युद्ध के बाद देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय — इसीलिए बंगाल में यह विजया दशमी है, देवी की विदाई का दिन। दोनों कथाएँ एक ही बात कहती हैं — अधर्म कितना भी बलवान हो, उसका अंत निश्चित है। अपराह्न काल इस पर्व का काल है; इसी में शस्त्र-पूजा, वाहन-पूजा व शमी-पूजन की परम्परा है।
दशहरा (विजयादशमी) — क्षेत्रीय परम्पराएँ
मैसूर का दशहरा (जंबू सवारी) और कुल्लू का सात-दिवसीय दशहरा राजकीय उत्सव हैं; उत्तर भारत में रामलीला व रावण-दहन; बंगाल में विजया दशमी — सिंदूर-खेला व प्रतिमा-विसर्जन; महाराष्ट्र में सोने के प्रतीक रूप में आपटे के पत्ते बाँटे जाते हैं।
दशहरा (विजयादशमी) — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2025 | गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 |
|---|---|
| 2026 | मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 |
| 2027 | शनिवार, 9 अक्टूबर 2027 |
| 2028 | बुधवार, 27 सितंबर 2028 |
| 2029 | मंगलवार, 16 अक्टूबर 2029 |