गोवर्धन पूजा 2026 — मंगलवार, 10 नवंबर 2026
Govardhan Puja · कार्तिक मास · 32 दिन बाद
गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
गोवर्धन पूजा 2026 में मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है — आज से 32 दिन बाद।
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा — अन्नकूट; गोवर्धन पर्वत व गौ-पूजन।
गोवर्धन पूजा का महत्व
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा — अन्नकूट; गोवर्धन पर्वत व गौ-पूजन।
यह पर्व कार्तिक मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।
गोवर्धन पूजा 2026 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 06:39 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:30 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:43 – 12:26 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:03 – 05:51 |
| राहुकाल (टालें) | 14:47 – 16:08 |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है, किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई — और प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँची गई है (गणना-सत्यापित)।
गोवर्धन पूजा पूजा-विधि
- प्रातः गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पुष्प-अक्षत से सजाएँ।
- छप्पन भोग/अन्नकूट अर्पित करें।
- गाय-बैल का पूजन कर परिक्रमा करें।
- 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप कर श्रीकृष्ण की आरती करें।
- अन्नकूट प्रसाद का वितरण करें।
गोवर्धन पूजा पूजा सामग्री
गोबर, अन्नकूट सामग्री, दीप, रोली, अक्षत, पुष्प, दूध, धूप
गोवर्धन पूजा — क्या करें, क्या न करें
गोवर्धन पर्वत का प्रतीक गोबर से बनाया जाता है और उसकी परिक्रमा कर अन्नकूट अर्पित किया जाता है। इस दिन गौ-पूजन का विशेष विधान है, और छप्पन भोग अथवा यथाशक्ति अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।
पूजा व मंत्र
कृष्ण की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (108 बार जप)।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।
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गोवर्धन पूजा की कथा
ब्रज में प्रतिवर्ष इन्द्र का यज्ञ होता था। बालक श्रीकृष्ण ने पूछा — वर्षा, घास व गौओं का पोषण तो गोवर्धन पर्वत से है, फिर पूजा किसी और की क्यों? ब्रजवासियों ने उनकी बात मानकर गोवर्धन व गौओं का पूजन किया। इससे रुष्ट होकर इन्द्र ने प्रलयंकारी वृष्टि की; तब श्रीकृष्ण ने कनिष्ठा उँगली पर गोवर्धन उठा लिया और सात दिन तक समस्त ब्रज को उसकी छाया में रखा। आठवें दिन इन्द्र का अहंकार टूटा और उन्होंने क्षमा माँगी। इसीलिए दीपावली के अगले दिन गोबर से गोवर्धन बनाकर परिक्रमा की जाती है और अन्नकूट — छप्पन प्रकार का भोग — अर्पित किया जाता है।
गोवर्धन पूजा — क्षेत्रीय परम्पराएँ
ब्रज में यह अन्नकूट है — छप्पन भोग व गोवर्धन-परिक्रमा; महाराष्ट्र-गुजरात में इसी दिन बलि-प्रतिपदा व व्यापारियों का नववर्ष; पंजाब-हरियाणा में गोबर से गोवर्धन बनाकर परिक्रमा।
गोवर्धन पूजा — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2025 | बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 |
|---|---|
| 2026 | मंगलवार, 10 नवंबर 2026 |
| 2027 | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 |
| 2028 | बुधवार, 18 अक्टूबर 2028 |
| 2029 | बुधवार, 7 नवंबर 2029 |