होली 2027 — मंगलवार, 23 मार्च 2027

Holi · चैत्र मास · 217 दिन बाद

होली 2027 कब है?

होली 2027 में मंगलवार, 23 मार्च 2027 को है — आज से 217 दिन बाद।

फाल्गुन पूर्णिमा की होलिका दहन के अगले दिन रंगों का पर्व — बुराई पर अच्छाई की विजय।

होली का महत्व

फाल्गुन पूर्णिमा की होलिका दहन के अगले दिन रंगों का पर्व — बुराई पर अच्छाई की विजय।

यह पर्व चैत्र मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (astronomy-engine + लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।

होली 2027 — पूजा का शुभ समय

सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:33
अभिजीत मुहूर्त12:03 – 12:52
ब्रह्म मुहूर्त04:46 – 05:34
राहुकाल (टालें)15:30 – 17:02
व्रत पारण06:21 के पश्चात् (24 मार्च 2027)

समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है (astronomy-engine), किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई।

होली पूजा-विधि

  1. पूर्णिमा की सायं शुभ (भद्रा-रहित) काल में होलिका दहन करें।
  2. होलिका के चारों ओर परिक्रमा कर जल, अक्षत व नारियल अर्पित करें।
  3. नई फसल (गेहूँ की बालें) अग्नि में अर्पित करें।
  4. अगले दिन रंगों से धुलेंडी मनाएँ; बड़ों को अबीर लगाकर आशीर्वाद लें।
  5. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का स्मरण करें।

होली पूजा सामग्री

गोबर के उपले, लकड़ी, नारियल, गेहूँ की बालें, अक्षत, जल, अबीर-गुलाल

पूजा व मंत्र

कृष्ण की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (108 बार जप)।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।

होली की कथा

भक्त प्रह्लाद को जलाने बैठी होलिका स्वयं भस्म हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे — यही बुराई पर भक्ति व सत्य की विजय होलिका दहन का आधार है।

होली — क्षेत्रीय परम्पराएँ

ब्रज (मथुरा-वृंदावन-बरसाना) की लट्ठमार व फूलों की होली प्रसिद्ध है; पंजाब में यह होला-मोहल्ला के रूप में; बंगाल-ओडिशा में दोल-यात्रा (डोल पूर्णिमा) के रूप में मनाई जाती है।

होली — आने वाले वर्षों की तिथियाँ

2026बुधवार, 4 मार्च 2026
2027मंगलवार, 23 मार्च 2027
2028शनिवार, 11 मार्च 2028
2029गुरुवार, 1 मार्च 2029
2030बुधवार, 20 मार्च 2030

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