कृष्ण जन्माष्टमी 2027 — मंगलवार, 24 अगस्त 2027
Krishna Janmashtami · भाद्रपद मास · 371 दिन बाद
कृष्ण जन्माष्टमी 2027 कब है?
कृष्ण जन्माष्टमी 2027 में मंगलवार, 24 अगस्त 2027 को है — आज से 371 दिन बाद।
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी — भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव; निशीथ काल (मध्यरात्रि) में जन्म-आरती।
कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी — भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव; निशीथ काल (मध्यरात्रि) में जन्म-आरती।
यह पर्व भाद्रपद मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (astronomy-engine + लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।
कृष्ण जन्माष्टमी 2027 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 05:55 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 18:51 |
| निशीथ काल (मुख्य पूजा) | 23:59 – 00:47 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:57 – 12:49 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:19 – 05:07 |
| राहुकाल (टालें) | 15:37 – 17:14 |
| व्रत पारण | 05:55 के पश्चात् (25 अगस्त 2027) |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है (astronomy-engine), किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई।
चार प्रहर की पूजा का समय
| प्रथम प्रहर | 18:51 – 21:37 |
|---|---|
| द्वितीय प्रहर | 21:37 – 00:23 |
| तृतीय प्रहर | 00:23 – 03:09 |
| चतुर्थ प्रहर | 03:09 – 05:55 |
रात्रि सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक चार बराबर प्रहरों में बाँटी जाती है, और प्रत्येक प्रहर में अभिषेक व पूजा का विधान है। जागरण करने वाले चारों प्रहर की पूजा करते हैं; एक ही बार करना हो तो निशीथ काल श्रेष्ठ है — वही वह क्षण है जिसमें यह पर्व प्रतिष्ठित है।
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा-विधि
- दिन भर उपवास रखें; सायंकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- बाल-गोपाल (लड्डू गोपाल) की मूर्ति को झूले/पालने में स्थापित करें।
- निशीथ काल (मध्यरात्रि ~12 बजे) में श्रीकृष्ण जन्म कराएँ — शंख-घंटी बजाकर जन्म-आरती करें।
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक कर माखन-मिश्री व तुलसी-दल का भोग लगाएँ।
- 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें; जन्म-आरती के बाद व्रत का पारण करें।
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा सामग्री
बाल-गोपाल मूर्ति, झूला, पंचामृत, माखन-मिश्री, तुलसी-दल, मोरपंख, बंसी, नए वस्त्र, दीप, धूप, पुष्प
कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम व विधि
व्रत मध्यरात्रि तक रखा जाता है, क्योंकि श्रीकृष्ण का जन्म निशीथ काल में हुआ था। दिन भर फलाहार अथवा निर्जल रहकर मध्यरात्रि में बाल-गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है — पंचामृत से अभिषेक, झूला-सज्जा, माखन-मिश्री व धनिया-पंजीरी का भोग। जन्म के पश्चात् आरती करके ही व्रत खोला जाता है।
पूजा व मंत्र
कृष्ण की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (108 बार जप)।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।
कृष्ण जन्माष्टमी की कथा
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि मथुरा के कारागार में देवकी-वसुदेव के यहाँ भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ; वसुदेव उन्हें यमुना पार कर गोकुल में नंद-यशोदा के पास छोड़ आए — इसी जन्म-लीला का उत्सव जन्माष्टमी है।
कृष्ण जन्माष्टमी — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2026 | शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 |
|---|---|
| 2027 | मंगलवार, 24 अगस्त 2027 |
| 2028 | रविवार, 13 अगस्त 2028 |
| 2029 | शुक्रवार, 31 अगस्त 2029 |
| 2030 | मंगलवार, 20 अगस्त 2030 |