महाशिवरात्रि 2027 — शनिवार, 6 मार्च 2027
Maha Shivaratri · फाल्गुन मास · 200 दिन बाद
महाशिवरात्रि 2027 कब है?
महाशिवरात्रि 2027 में शनिवार, 6 मार्च 2027 को है — आज से 200 दिन बाद।
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — शिव-पार्वती विवाह की रात्रि। निशिता काल में जागरण, अभिषेक व रात्रि-पूजा का विधान।
महाशिवरात्रि का महत्व
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — शिव-पार्वती विवाह की रात्रि। निशिता काल में जागरण, अभिषेक व रात्रि-पूजा का विधान।
यह पर्व फाल्गुन मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (astronomy-engine + लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।
महाशिवरात्रि 2027 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 06:41 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 18:23 |
| निशीथ काल (मुख्य पूजा) | 00:08 – 00:56 |
| अभिजीत मुहूर्त | 12:09 – 12:56 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:05 – 05:53 |
| राहुकाल (टालें) | 09:37 – 11:04 |
| व्रत पारण | 06:40 के पश्चात् (7 मार्च 2027) |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है (astronomy-engine), किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई।
चार प्रहर की पूजा का समय
| प्रथम प्रहर | 18:23 – 21:28 |
|---|---|
| द्वितीय प्रहर | 21:28 – 00:32 |
| तृतीय प्रहर | 00:32 – 03:36 |
| चतुर्थ प्रहर | 03:36 – 06:40 |
रात्रि सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक चार बराबर प्रहरों में बाँटी जाती है, और प्रत्येक प्रहर में अभिषेक व पूजा का विधान है। जागरण करने वाले चारों प्रहर की पूजा करते हैं; एक ही बार करना हो तो निशीथ काल श्रेष्ठ है — वही वह क्षण है जिसमें यह पर्व प्रतिष्ठित है।
महाशिवरात्रि पूजा-विधि
- दिन भर उपवास रख सायंकाल स्नान करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद व गंगाजल से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक-पुष्प व चंदन अर्पित करें।
- चार प्रहर की पूजा करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें।
- रात्रि जागरण कर शिव-आरती करें; अगले दिन पारण करें।
महाशिवरात्रि पूजा सामग्री
बेलपत्र, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, धतूरा, भांग, आक-पुष्प, चंदन, दीप, धूप
महाशिवरात्रि व्रत के नियम व विधि
इस दिन निर्जल अथवा फलाहार व्रत का विधान है। अन्न, मांस, प्याज व लहसुन वर्जित हैं। जागरण करने वाले रात्रि के चारों प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक करते हैं — जल, दूध, दही, घृत, मधु व गंगाजल से; बिल्वपत्र, धतूरा व भाँग अर्पित की जाती है। बिल्वपत्र सदा उलटा (चिकनी ओर नीचे) चढ़ाया जाता है, और तीन पत्तियों वाला अखंडित पत्र श्रेष्ठ है। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के पश्चात् किया जाता है।
पूजा व मंत्र
शिव की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ नमः शिवाय (108 बार जप)।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।
महाशिवरात्रि की कथा
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि शिव-पार्वती के विवाह की तिथि मानी जाती है; इसी रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक व चार प्रहर की पूजा का विशेष विधान है।
महाशिवरात्रि — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2026 | रविवार, 15 फ़रवरी 2026 |
|---|---|
| 2027 | शनिवार, 6 मार्च 2027 |
| 2028 | बुधवार, 23 फ़रवरी 2028 |
| 2029 | रविवार, 11 फ़रवरी 2029 |
| 2030 | शनिवार, 2 मार्च 2030 |