पितृ पक्ष 2026 — शनिवार, 26 सितंबर 2026
Pitru Paksha · भाद्रपद मास · चल रहा है — आज चौदहवाँ दिन (कुल 15)
पितृ पक्ष 2026 कब है?
पितृ पक्ष 2026 में शनिवार, 26 सितंबर 2026 को है।
भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक सोलह दिन — पितरों के श्राद्ध व तर्पण का काल।
पितृ पक्ष का महत्व
भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक सोलह दिन — पितरों के श्राद्ध व तर्पण का काल।
यह पर्व भाद्रपद मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।
पितृ पक्ष 2026 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 06:11 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 18:13 |
| अपराह्न काल (पूजा) | 13:24 – 15:48 |
| कुतप काल (श्राद्ध हेतु श्रेष्ठ) | 11:48 – 12:36 |
| रोहिण काल | 12:36 – 13:24 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:35 – 05:23 |
| राहुकाल (टालें) | 09:11 – 10:42 |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है, किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई — और प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँची गई है (गणना-सत्यापित)।
पितृ पक्ष श्राद्ध-विधि
- प्रातः स्नान कर दक्षिण दिशा की ओर मुख कर तर्पण करें।
- जल, तिल, कुश व जौ से पितरों को अर्घ्य दें।
- मृत्यु-तिथि के अनुसार योग्य दिन पिंडदान व श्राद्ध-कर्म करें।
- यथाशक्ति ब्राह्मण-भोज कराकर वस्त्र व दक्षिणा दें।
- गाय, कौआ व श्वान हेतु ग्रास (भोजन-अंश) निकालें।
पितृ पक्ष तर्पण सामग्री
तिल, कुश, जौ, जल, पिंड (चावल/जौ आटा), वस्त्र, दक्षिणा, दीप, तुलसी
पितृ पक्ष — क्या करें, क्या न करें
श्राद्ध अपराह्न काल में किया जाता है — प्रातः नहीं; कुतप (दिन का आठवाँ मुहूर्त) सर्वश्रेष्ठ माना गया है। तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख कर, जल में तिल व कुश लेकर किया जाता है। ब्राह्मण-भोजन, गौ-कौआ-श्वान के लिए ग्रास तथा अन्न-वस्त्र का दान इसका अंग है। इन दिनों नया गृह-प्रवेश, विवाह, वाहन या आभूषण की खरीद तथा मांगलिक आरंभ टाले जाते हैं; मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज व बाल-दाढ़ी कटाना वर्जित माना गया है। जिनकी मृत्यु-तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या को होता है।
पूजा व मंत्र
पितृ की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ पितृभ्यः नमः (108 बार जप)।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।
पितृ पक्ष की कथा
महाभारत की परम्परा में कहा जाता है कि दानवीर कर्ण जब स्वर्ग पहुँचे तो उन्हें भोजन के स्थान पर स्वर्ण परोसा गया। कारण पूछने पर इन्द्र ने कहा — जीवन भर तुमने स्वर्ण का दान किया, अन्न का कभी नहीं; पितरों के निमित्त तर्पण भी नहीं किया। तब कर्ण को सोलह दिन के लिए पृथ्वी पर लौटने का अवसर मिला, और उन्होंने इन्हीं दिनों में अन्न-जल का दान व पितृ-तर्पण किया। यही सोलह दिन पितृ पक्ष कहलाए। भाव यह है कि पूर्वजों का ऋण धन से नहीं, श्रद्धा व अन्न-दान से उतरता है — इसीलिए इसे श्राद्ध कहा गया, श्रद्धा से जो किया जाए वही श्राद्ध है।
पितृ पक्ष — क्षेत्रीय परम्पराएँ
गया (बिहार) का पिण्डदान सर्वोपरि माना जाता है; बंगाल में महालया के दिन प्रातः महिषासुरमर्दिनी का पाठ सुनकर देवी-पक्ष का आरंभ होता है। दक्षिण भारत में इसे महालय पक्ष कहते हैं और वहाँ तर्पण के साथ पितृ-भोजन की परम्परा है; महाराष्ट्र-गुजरात में इसे पितृ पंधरवड़ा/श्राद्ध पक्ष कहा जाता है।
पितृ पक्ष 2026 — श्राद्ध तिथियाँ
श्राद्ध अपराह्न काल (दिन का आठवाँ मुहूर्त) में किया जाता है; नीचे हर दिन की तिथि उसी काल पर गणना से निकाली गई है। पितृ पक्ष शनिवार, 26 सितंबर 2026 से शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 तक है।
| शनिवार, 26 सितंबर 2026 | पूर्णिमा श्राद्ध प्रोष्ठपदी/भाद्रपदी पूर्णिमा — महालय आरंभ; ऋषि-तर्पण |
|---|---|
| रविवार, 27 सितंबर 2026 | प्रतिपदा श्राद्ध |
| सोमवार, 28 सितंबर 2026 | द्वितीया श्राद्ध |
| मंगलवार, 29 सितंबर 2026 | तृतीया श्राद्ध |
| बुधवार, 30 सितंबर 2026 | चतुर्थी श्राद्ध |
| गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 | षष्ठी श्राद्ध — पंचमी क्षय — इसी दिन उनका भी श्राद्ध |
| शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 | सप्तमी श्राद्ध |
| शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 | अष्टमी श्राद्ध |
| रविवार, 4 अक्टूबर 2026 | नवमी श्राद्ध मातृ नवमी — माता, दादी व कुल की स्त्रियों का श्राद्ध |
| सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 | दशमी श्राद्ध |
| मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 | एकादशी श्राद्ध |
| बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 | द्वादशी श्राद्ध संन्यासी/यति द्वादशी — संन्यास लेने वालों का श्राद्ध |
| गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 | त्रयोदशी श्राद्ध |
| शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 | चतुर्दशी श्राद्ध घात चतुर्दशी — दुर्घटना, शस्त्र या अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध |
| शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 | अमावस्या श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या — जिनकी तिथि ज्ञात नहीं, उन सबका श्राद्ध; पितृ-विसर्जन |
पितृ पक्ष — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2025 | रविवार, 7 सितंबर 2025 |
|---|---|
| 2026 | शनिवार, 26 सितंबर 2026 |
| 2027 | बुधवार, 15 सितंबर 2027 |
| 2028 | रविवार, 3 सितंबर 2028 |
| 2029 | शनिवार, 22 सितंबर 2029 |