रक्षाबंधन 2026 — शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Raksha Bandhan · श्रावण मास · 10 दिन बाद
रक्षाबंधन 2026 कब है?
रक्षाबंधन 2026 में शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को है — आज से 10 दिन बाद।
श्रावण पूर्णिमा — बहन भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधती है। भद्रा-रहित काल में राखी का विधान।
रक्षाबंधन का महत्व
श्रावण पूर्णिमा — बहन भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधती है। भद्रा-रहित काल में राखी का विधान।
यह पर्व श्रावण मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (astronomy-engine + लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।
रक्षाबंधन 2026 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 05:57 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 18:47 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:56 – 12:47 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:21 – 05:09 |
| राहुकाल (टालें) | 10:45 – 12:22 |
| व्रत पारण | 05:57 के पश्चात् (29 अगस्त 2026) |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है (astronomy-engine), किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई।
रक्षाबंधन पूजा-विधि
- प्रातः स्नान कर बहन थाली में राखी, रोली, अक्षत व दीप सजाए।
- भद्रा-रहित शुभ काल देखकर ही राखी बाँधें (भद्रा में वर्जित)।
- भाई को तिलक कर दाहिनी कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधें व आरती उतारें।
- भाई की दीर्घायु की कामना कर मिष्ठान्न खिलाएँ।
- भाई बहन को उपहार व रक्षा का वचन देता है।
रक्षाबंधन पूजा सामग्री
राखी, रोली, अक्षत, दीप, मिठाई, नारियल, थाली
रक्षाबंधन व्रत के नियम व विधि
राखी सदा भद्रा-रहित काल में बाँधी जाती है — भद्रा में रक्षा-सूत्र बाँधना शास्त्र में निषिद्ध है। बहन भाई को तिलक कर, दाहिनी कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधकर आरती उतारती है; भाई रक्षा का वचन देता है।
पूजा व मंत्र
विष्णु की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (108 बार जप)।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।
रक्षाबंधन — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2025 | शनिवार, 9 अगस्त 2025 |
|---|---|
| 2026 | शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 |
| 2027 | मंगलवार, 17 अगस्त 2027 |
| 2028 | शनिवार, 5 अगस्त 2028 |
| 2029 | शुक्रवार, 24 अगस्त 2029 |