शरद पूर्णिमा 2027 — गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027
Sharad Purnima · आश्विन मास · 422 दिन बाद
शरद पूर्णिमा 2027 कब है?
शरद पूर्णिमा 2027 में गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027 को है — आज से 422 दिन बाद।
आश्विन पूर्णिमा — कोजागरी; चन्द्रमा की किरणों में खीर रखने व लक्ष्मी-जागरण की परम्परा।
शरद पूर्णिमा का महत्व
आश्विन पूर्णिमा — कोजागरी; चन्द्रमा की किरणों में खीर रखने व लक्ष्मी-जागरण की परम्परा।
यह पर्व आश्विन मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (astronomy-engine + लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।
शरद पूर्णिमा 2027 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 06:21 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:53 |
| चन्द्रोदय (अर्घ्य व पारण) | 16:57 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:44 – 12:30 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:45 – 05:33 |
| राहुकाल (टालें) | 13:33 – 15:00 |
| व्रत पारण | 06:21 के पश्चात् (15 अक्टूबर 2027) |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है (astronomy-engine), किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई।
शरद पूर्णिमा पूजा-विधि
- रात्रि में लक्ष्मी जी का पूजन करें।
- गाय के दूध की खीर बनाकर स्वच्छ/चाँदी पात्र में रखें।
- खीर को रातभर चन्द्रमा की किरणों में छत पर रखें (अमृत-वर्षा मान्यता)।
- 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का जप कर लक्ष्मी-जागरण करें।
- प्रातः वह खीर प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
शरद पूर्णिमा पूजा सामग्री
गाय का दूध, चावल, शक्कर, मेवा, चाँदी/स्वच्छ पात्र, दीप, पुष्प
पूजा व मंत्र
लक्ष्मी की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः (108 बार जप)।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।
शरद पूर्णिमा की कथा
मान्यता है कि इस रात्रि चन्द्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होकर अमृत की वर्षा करता है, इसीलिए खीर को चाँदनी में रखा जाता है; इसी रात्रि (कोजागरी) जागरण करने वालों पर माँ लक्ष्मी की कृपा होती है।
शरद पूर्णिमा — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2026 | रविवार, 25 अक्टूबर 2026 |
|---|---|
| 2027 | गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027 |
| 2028 | सोमवार, 2 अक्टूबर 2028 |
| 2029 | रविवार, 21 अक्टूबर 2029 |
| 2030 | गुरुवार, 10 अक्टूबर 2030 |