गणेश स्थापना व विसर्जन मुहूर्त — 4 सितंबर 2027, गुवाहाटी
शनिवार · सूर्योदय 05:04 · सूर्यास्त 17:40 · गुवाहाटी
स्थापना का मुहूर्त — मध्याह्न काल
| मध्याह्न (स्थापना) | 10:06 AM – 12:37 PM |
|---|---|
| अभिजीत मुहूर्त | 10:56 – 11:47 |
| ब्रह्म मुहूर्त (तैयारी) | 03:28 – 04:16 |
| सूर्योदय | 05:04 |
| सूर्यास्त | 17:40 |
मध्याह्न में ही स्थापना क्यों
शास्त्र के अनुसार श्री गणेश का प्राकट्य मध्याह्न काल में हुआ, इसीलिए स्थापना इसी काल में की जाती है। मध्याह्न निकालने का नियम है — सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को पाँच बराबर भागों में बाँटकर तीसरा भाग। गुवाहाटी में यह 10:06 AM – 12:37 PM बनता है।
ध्यान रहे — यह काल शहर के सूर्योदय से बदलता है। एक ही "राष्ट्रीय" समय हर शहर के लिए ठीक नहीं होता।
क्या राहुकाल में स्थापना नहीं कर सकते?
तिथि-निर्णीत पर्व-मुहूर्त में राहुकाल, यमगण्ड आदि का विचार नहीं किया जाता — मध्याह्न स्वयं गणेश पूजा का निर्धारित काल है। इसीलिए पंचांग भी मध्याह्न में से राहुकाल नहीं काटते।
गुवाहाटी में उस दिन राहुकाल 08:13 – 09:47, यमगण्ड 12:56 – 14:31 व गुलिक काल 05:04 – 06:38 रहेगा। ये सामान्य कार्यों के लिए त्याज्य हैं; पर्व के निर्धारित काल पर लागू नहीं होते।
स्थापना के अन्य शुभ विकल्प (सामान्य चौघड़िया)
ये पर्व-मुहूर्त नहीं हैं — सामान्य शुभ चौघड़िया हैं। मध्याह्न में किसी कारण स्थापना न हो सके, तो इनमें की जा सकती है। हर चौघड़िया को "गणेश स्थापना मुहूर्त" कह देना भ्रम फैलाता है; शास्त्र मुख्य काल एक ही मानता है।
दिन के शुभ चौघड़िया
| चौघड़िया | समय |
|---|---|
| शुभ | 06:38 – 08:13 |
| लाभ | 12:56 – 14:31 |
| अमृत | 14:31 – 16:05 |
विसर्जन कब करें — अवधि के अनुसार
| अवधि | विसर्जन तिथि | शुभ चौघड़िया |
|---|---|---|
| डेढ़ दिन | 5 सितंबर 2027 | लाभ 08:13–09:47 अमृत 09:47–11:21 शुभ 12:56–14:30 |
| तीन दिन | 6 सितंबर 2027 | अमृत 05:04–06:39 शुभ 08:13–09:47 लाभ 14:29–16:03 |
| पाँच दिन | 8 सितंबर 2027 | लाभ 05:05–06:39 अमृत 06:39–08:13 शुभ 09:46–11:20 |
| सात दिन | 10 सितंबर 2027 | लाभ 06:39–08:13 अमृत 08:13–09:46 शुभ 11:20–12:53 |
| दस दिन / अनंत चतुर्दशी | 14 सितंबर 2027 | लाभ 09:45–11:18 अमृत 11:18–12:51 शुभ 14:23–15:56 |
डेढ़ दिन के गणपति का विसर्जन
डेढ़ दिन का अर्थ है — चतुर्थी को स्थापना और अगले दिन (पंचमी) उत्तर पूजा के बाद विसर्जन। यह घंटों की गिनती (36 घंटे) नहीं, दिन की गिनती है।
विसर्जन के लिए कोई अलग पर्व-मुहूर्त नहीं होता। परंपरा है — उत्तर पूजा के बाद, किसी शुभ चौघड़िया में, राहुकाल से बचकर। ऊपर की तालिका में हर अवधि के लिए उसी दिन के शुभ चौघड़िया दिए हैं।
अनंत चतुर्दशी
दस दिन के गणपति का विसर्जन अनंत चतुर्दशी को होता है — 14 सितंबर 2027। यह तिथि से निकाली जाती है (भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी), दिन गिनकर नहीं; इसीलिए यह सदा चतुर्थी से ठीक दस दिन बाद नहीं पड़ती।
गणेश स्थापना की विधि
- शुभ मुहूर्त (मध्याह्न) में गणपति की मूर्ति स्थापित करें।
- प्राण-प्रतिष्ठा कर गंगाजल से स्नान कराएँ; लाल वस्त्र व जनेऊ अर्पित करें।
- दूर्वा (21 गाँठ), लाल पुष्प, अक्षत, चंदन व मोदक अर्पित करें।
- 'ॐ गं गणपतये नमः' का जप कर गणेश आरती करें।
- दस दिन प्रातः-सायं पूजा के बाद अनंत चतुर्दशी को विसर्जन करें।
पूजा-सामग्री
गणेश मूर्ति, दूर्वा, मोदक/लड्डू, लाल पुष्प, अक्षत, चंदन, जनेऊ, लाल वस्त्र, दीप, धूप, कपूर
क्षेत्रीय परंपराएँ
महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव व दस-दिवसीय विसर्जन-यात्रा इसकी पहचान है; दक्षिण भारत में इसे विनायक चतुर्थी के रूप में घर-घर मनाया जाता है; गोवा में चवथ के नाम से।
गणना के बारे में
हर समय गुवाहाटी के सूर्योदय (05:04) व सूर्यास्त (17:40) से गिना गया है — उसी खगोलीय गणना से जो इस ऐप का पंचांग व कुंडली चलाती है। तिथि किसी वर्ष के लिए लिखी हुई नहीं; हर वर्ष अपने-आप निकलती है।
अपने शहर का गणपति मुहूर्त देखें
नई दिल्ली · मुंबई · कोलकाता · चेन्नई · बेंगलुरु · हैदराबाद · पुणे · अहमदाबाद · जयपुर · लखनऊ · कानपुर · नागपुर · इंदौर · भोपाल · पटना · सूरत · चंडीगढ़ · अमृतसर · कोच्चि · वाराणसी · प्रयागराज · हरिद्वार · उज्जैन · अयोध्या · तिरुपति · मथुरा · पुरी