आरति कीजै जनक-ललीकी

भगवान राम · Ram · आरती

आरति कीजै जनक-ललीकी — भगवान राम

आरति कीजै जनक-ललीकी के बोल

आरति कीजै जनक-ललीकी। राममधुपमन कमल-कलीकी॥
रामचंद्र मुखचंद्र चकोरी। अंतर साँवर बाहर गोरी।
सकल सुमंगल सुफल फलीकी॥
पिय दूगमृग जुग बंधन डोरी। पीय प्रेम रस-राशि किशोरी।
पिय मन गति विश्राम थलीकी॥
रूप-रास-गुननिधि जग स्वामिनि। प्रेम प्रबीन राम अभिरामिनि।
सरबस धन 'हरिचंद' अलीकी॥

अगला संबंधित व्रत

भगवान राम से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

भगवान राम के अन्य पाठ