कृत्वा शिरसि निदेशं पितुरंसे चापम्
भगवान राम · Ram · स्तोत्र
कृत्वा शिरसि निदेशं पितुरंसे चापम् के बोल
कृत्वा शिरसि निदेशं पितुरंसे चापम्।
कृतमखरक्षो हतवान् कौशिकहत्तापम्॥
गत्वा तेनैव समं मिथिलाधीशसदः।
शिवधनुषा सह भग्नः शरमन्यमदः॥ १॥
जय जय रघुकुलभूषण भगवन् दाशरथे।
रमतां त्वयि चित्तमिदं शंकरगीतकथे॥
स्पृष्टा पदरजसा ते शैली मुनियोषा।
साध्वीष्वाद्यं लेभे पदमपगतदोषा॥
उपहतबदरा शबरी जात्यातिजघन्या।
दृष्ट्या ते पदपङ्कजमभवद् भुवि धन्या॥ २॥
कपिकुलजोऽप्येको भुवि हनुमान् सफलजनुः।
सुधिया येन नियुक्ता तव कार्ये स्वतनुः॥
तीर्णो मृत्युः कृत्वा त्वां सुहृदं प्रेष्ठम्।
स्थाने प्राहुर्मुनयो यं सुधियां श्रेष्ठम्॥ ३॥
पारं लवणाम्भोधेः कपिसेनां नेतुम्।
अगला संबंधित व्रत
भगवान राम से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।
भगवान राम मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है।
माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।