आरति श्रीजनक-दुलारीकी
भगवान राम · Ram · आरती
आरति श्रीजनक-दुलारीकी के बोल
आरति श्रीजनक-दुलारीकी।
सीताजी रघुबर-प्यारीकी॥ टेक ॥
जगत-जननि जगकी विस्तारिणि,
नित्य सत्य साकेत-विहारिणि,
परम दयामयि दीनोद्धारिणि,
मैया भक्तन-हितकारीकी॥ सीताजी०॥
सती शिरोमणि पति-हित-कारिणि,
पति-सेबा हित वन-वन चारिणि,
पति-हित पति-वियोग-स्वीकारिणि,
त्याग-धर्म-मूरति-धारीकी॥ सीताजी०॥
विमल-कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पावन मति आई,
सुमिरत कटत कष्ट दुखदाई,
शरणागत-जन-भय-हारीकी॥ सीताजी०॥
अगला संबंधित व्रत
भगवान राम से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।