आज बनी छबि भारी श्रीराघवजीकी
भगवान राम · Ram · आरती
आज बनी छबि भारी श्रीराघवजीकी के बोल
आज बनी छबि भारी श्रीराघवजीकी।
सहित जानकी रत्नसिंहासन राजत अवधबिहारी॥ १॥
रवि शशि कोटि देखि छबि लाजे तिलक पटल द्युतिकारी।
बदनमयंक तापत्रयमोचन मंद हासरस न्यारी॥ २॥
बाम अंग श्रीसीताजी सोहैं, हनुमत आज्ञाकारी।
गौर श्याम सुंदर तन सोहै चन्द्रबदन उजियारी॥ ३॥
रत्नजटित आभूषण सोहै मोतिनकी छबि भारी।
क्रीट मुकुट मकराकृत कुंडल गल बनमाला प्यारी॥ ४॥
बाहु विशाल विभूषण सुन्दर कर शुचि सारंगधारी।
कटि पट पीत बसनकी सोभा मोहन मदन निहारी॥ ५॥
मुनिजन चरण सरोरुह सेवत ध्यान धरत त्रिपुरारी।
चतुर सखी मिलि करत आरती सज कंचनकी थारी॥ ६॥
सेवक-राम जयध्वनि उचरत गावत पुर नर-नारी।
मातु कौसिला लेत बलैया तन-मन सर्बस वारी॥ ७॥
अगला संबंधित व्रत
भगवान राम से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।