गृह गृह आगन होत आरती (सिंहासनासीन श्रीरामचन्द्र)
भगवान राम · Ram · आरती
गृह गृह आगन होत आरती (सिंहासनासीन श्रीरामचन्द्र) के बोल
गृह गृह आगन होत आरती।
श्रीरामचंद्र सिंहासन बैठे चाप छत्र धराई॥
मंगल साज लिएँ सब सुंदरि जत्र नृतन सजि आई।
तिलक किएँ जत्र अंकुर सिर धरि आरति करत सुहाई॥
जय-जयकार भयो त्रिभुवन दुंदुभि देख बजाई।
सुर नर मुनिजन मुदित, पुष्प बरसावत अंगन छाई॥
चिर जीयो अविचल रजधानी भक्तनके सुखदाई।
श्रीरघुनाथ चरन-पंकज-रज रामदास निधि पाई॥
अगला संबंधित व्रत
भगवान राम से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।