जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी
भगवान शिव · Shiva · आरती
जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी के बोल
जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी॥
अजर अमर अज अरूप, सत चित आनंदरूप,
व्यापक ब्रह्मस्वरूप, भव! भव-भय-हारी॥ जयति०॥
शोभित बिधुबाल भाल, सुरसरिमय जटाजाल,
तीन नयन अति विशाल, मदन-दहन-कारी॥ जयति०॥
भक्तहेतु धरत शूल, करत कठिन शूल फूल,
हियको सब हरत हूल अचल शान्तिकारी॥ जयति०॥
अमल अरुण चरणकमल सफल करत काम सकल,
भक्ति-मुक्ति देत विमल, माया-भ्रम-टारी॥ जयति०॥
कार्तिकेय युत गणेश, हिमतनया सह महेश,
राजत कैलास-देश, अकल कलाधारी॥ जयति०॥
भूषण तन भूति ब्याल, मुण्डमाल कर कपाल,
सिंह-चर्म हस्ति खाल, डमरू कर धारी॥ जयति०॥
अशरण जन नित्य शरण, आशुतोष आर्तिहरण,
सब बिधि कल्याण-करण जय जय त्रिपुरारी॥ जयति०॥
जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी — कब पढ़ें
भगवान शिव की आराधना का दिन सोमवार है — अगला सोमवार, 24 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
अगला संबंधित व्रत
भगवान शिव से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल प्रदोष, मंगलवार, 25 अगस्त (7 दिन बाद)।
अन्य: मासिक शिवरात्रि — बुधवार, 9 सितंबर।