जुगल छबिकी आरति करूं नीकी
भगवान राम · Ram · आरती
जुगल छबिकी आरति करूं नीकी के बोल
जुगल छबिकी आरति करूं नीकी।
गौर-बरन श्रीजनकललीकी, स्याम-बरन सिय-पीकी॥
मुकुट चंद्रिकामें द्युति राजै अगनित सूर्य-ससीकी।
सुंदर अंग-अंगमें छबि है कोटिन काम-रतीकी॥
जुगलरूपमें सबही पटतर उपमा हो गई फीकी।
रामेस्वर लखि ललित जुगल छबि हुलसत हिय सबहीकी॥
अगला संबंधित व्रत
भगवान राम से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।