कर्पूरगौरं आरती

भगवान शिव · Shiva · आरती

कर्पूरगौरं आरती — भगवान शिव

कर्पूरगौरं आरती के बोल

कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्
सदावसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि

मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः।
मङ्गलं पुण्डरीकाक्षो मङ्गलाय तनो हरिः॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते

त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
त्वमेव सर्वं मम देव देव

कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा
बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात्
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै
नारायणायेति समर्पयामि

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव ।
जिह्वे पिबस्वामृतमेतदेव गोविन्द दामोदर माधवेति ॥

कर्पूरगौरं आरती — कब पढ़ें

भगवान शिव की आराधना का दिन सोमवार है — अगला सोमवार, 26 अक्टूबर को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

अगला संबंधित व्रत

भगवान शिव से जुड़ा अगला व्रत — कृष्ण प्रदोष, शुक्रवार, 6 नवंबर (12 दिन बाद)।

अन्य: मासिक शिवरात्रि — शनिवार, 7 नवंबर।

भगवान शिव के अन्य पाठ