पर्वतवासिनी देवी आरती (सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी)

माँ दुर्गा · Durga · आरती

पर्वतवासिनी देवी आरती (सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी) — माँ दुर्गा

पर्वतवासिनी देवी आरती (सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी) के बोल

॥ श्री विन्ध्येश्वरी आरती ॥
(यही आरती हिंगलाज माता व ज्वालाजी के लिए भी गाई जाती है)

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी।
कोई तेरा पार न पाया माँ॥ ॥ टेक ॥

पान सुपारी ध्वजा नारियल।
ले तेरी भेंट चढ़ाया माँ॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी ॥

सुवा चोली तेरे अंग बिराजे।
केसर तिलक लगाया॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी ॥

नंगे पग माँ अकबर आया।
सोने का छत्र चढ़ाया॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी ॥

ऊँचे-ऊँचे पर्वत बन्यो देवालय।
नीचे शहर बसाया॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी ॥

सतयुग, त्रेता, द्वापर मध्ये।
कलियुग राज सवाया॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी ॥

धूप दीप नैवेद्य आरती।
मोहन भोग लगाया॥
॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी ॥

ध्यानू भगत मैया तेरे गुण गावै।
मनवांछित फल पाया॥

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी।
कोई तेरा पार न पाया माँ॥

पर्वतवासिनी देवी आरती (सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी) — कब पढ़ें

आज मंगलवार है — माँ दुर्गा की आराधना का दिन। आज का जप विशेष फलदायी माना गया है।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

अगला संबंधित व्रत

माँ दुर्गा से जुड़ा अगला व्रत — मासिक दुर्गाष्टमी, गुरुवार, 20 अगस्त (2 दिन बाद)।

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