कृष्ण जन्माष्टमी 2028 — रविवार, 13 अगस्त 2028

Krishna Janmashtami · भाद्रपद मास · 674 दिन बाद

कृष्ण जन्माष्टमी 2028 कब है?

कृष्ण जन्माष्टमी 2028 में रविवार, 13 अगस्त 2028 को है — आज से 674 दिन बाद।

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी — भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव; निशीथ काल (मध्यरात्रि) में जन्म-आरती।

कृष्ण जन्माष्टमी 2028 — पूजा का शुभ समय

सूर्योदय05:49
सूर्यास्त19:01
निशीथ काल (मुख्य पूजा)00:02 – 00:50
अभिजीत मुहूर्त11:59 – 12:52
ब्रह्म मुहूर्त04:13 – 05:01
राहुकाल (टालें)17:22 – 19:01
व्रत पारण05:50 के पश्चात् (14 अगस्त 2028)

समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है, किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई — और प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँची गई है (गणना-सत्यापित)।

चार प्रहर की पूजा का समय

प्रथम प्रहर19:01 – 21:44
द्वितीय प्रहर21:44 – 00:26
तृतीय प्रहर00:26 – 03:08
चतुर्थ प्रहर03:08 – 05:50

रात्रि सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक चार बराबर प्रहरों में बाँटी जाती है, और प्रत्येक प्रहर में अभिषेक व पूजा का विधान है। जागरण करने वाले चारों प्रहर की पूजा करते हैं; एक ही बार करना हो तो निशीथ काल श्रेष्ठ है — वही वह क्षण है जिसमें यह पर्व प्रतिष्ठित है।

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम व विधि

व्रत मध्यरात्रि तक रखा जाता है, क्योंकि श्रीकृष्ण का जन्म निशीथ काल में हुआ था। दिन भर फलाहार अथवा निर्जल रहकर मध्यरात्रि में बाल-गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है — पंचामृत से अभिषेक, झूला-सज्जा, माखन-मिश्री व धनिया-पंजीरी का भोग। जन्म के पश्चात् आरती करके ही व्रत खोला जाता है।

संबंधित पाठ व पर्व

कृष्ण जन्माष्टमी — आने वाले वर्षों की तिथियाँ

2027मंगलवार, 24 अगस्त 2027
2028रविवार, 13 अगस्त 2028
2029शुक्रवार, 31 अगस्त 2029
2030मंगलवार, 20 अगस्त 2030
2031शनिवार, 9 अगस्त 2031

कृष्ण जन्माष्टमी की विधि, सामग्री व कथा

पूजा-विधि, सामग्री, कथा तथा क्षेत्रीय परम्पराएँ हर वर्ष एक ही रहती हैं — वे कृष्ण जन्माष्टमी के मुख्य पृष्ठ पर एक ही जगह दी गई हैं। यह पृष्ठ केवल 2028 का बताता है: तिथि, वार व उस दिन का अपना काल।

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