शिवस्मरण
भगवान शिव · Shiva · मंत्र
शिवस्मरण के बोल
प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं
गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम्।
खट्वाङ्गशूलवरदाभयहस्तमीशं
संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्॥
— स्रोत: गीताप्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, पृष्ठ 23
शिवस्मरण — कब पढ़ें
भगवान शिव की आराधना का दिन सोमवार है — अगला सोमवार, 19 अक्टूबर को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
अगला संबंधित व्रत
भगवान शिव से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल प्रदोष, शुक्रवार, 23 अक्टूबर (5 दिन बाद)।
अन्य: मासिक शिवरात्रि — शनिवार, 7 नवंबर।
भगवान शिव मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; भगवान शिव की आराधना का वार सोमवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **रुद्राक्ष** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।