श्री श्याम देव स्तोत्र (बर्बरीक स्तुति)

खाटू श्याम · Khatu Shyam · स्तोत्र

श्री श्याम देव स्तोत्र (बर्बरीक स्तुति) — खाटू श्याम

श्री श्याम देव स्तोत्र (बर्बरीक स्तुति) के बोल

॥ स्कन्दपुराणोक्त श्री श्याम देव स्तोत्र ॥

जय जय चतुरशीतिकोटिपरिवार सूर्यवर्चाभिधान यक्षराज।
जय भूभारहरणप्रवृत्त लघुशापप्राप्तनैऋतयोनिसम्भव।
जय कामकंटकटाकुक्षि राजहंस।
जय घटोत्कचानन्दवर्धन बर्बरीकाभिधान।
जय कृष्णोपदिष्ट श्रीगुप्तक्षेत्रदेवीसमाराधन प्राप्तातुलवीर्य।
जय विजयसिद्धिदायक।
जय पिंगल-रेपलेन्द्र-दुहद्रुहा नवकोटीश्वर पलाशिदावानल।
जय भूपालान्तराले नागकन्या परिहारक।
जय श्रीभीममानमर्दन।
जय सकलकौरवसेनावधमुहूर्तप्रवृत्त।
जय श्रीकृष्णवरलब्धसर्ववरप्रदानसामर्थ्य।
जय जय कलिकालवन्दित नमो नमस्ते पाहि पाहि॥

॥ फलश्रुति (स्कन्द पुराण, कौ.ख. 66.116) ॥
अनेन यः सुहृदयं श्रावणेऽभ्यर्च्य दर्शके।
वैशाखे च त्रयोदश्यां कृष्णपक्षे द्विजोत्तमाः।
शतदीपैः पुरिकाभिः संस्तवेत्तस्य तुष्यति॥

अगला संबंधित व्रत

खाटू श्याम से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

खाटू श्याम मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है।

माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

खाटू श्याम के अन्य पाठ