श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम्

माँ दुर्गा · Durga · स्तोत्र

श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् — माँ दुर्गा

श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् के बोल

निशुम्भशुम्भमर्दिनीं प्रचण्डमुण्डखण्डनीम्।
वने रणे प्रकाशिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्॥१॥

त्रिशूलमुण्डधारिणीं धराविघातहारिणीम्।
गृहे गृहे निवासिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्॥२॥

दरिद्रदुःखहारिणीं सतां विभूतिकारिणीम्।
वियोगशोकहारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्॥३॥

लसत्सुलोललोचनां जने सदा वरप्रदाम्।
कपालशूलधारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्॥४॥

करे मुदा गदाधरीं शिवां शिवप्रदायिनीम्।
वरां वराननां शुभां भजामि विन्ध्यवासिनीम्॥५॥

ऋषीन्द्रजामिनीप्रदां त्रिधास्वरूपधारिणीम्।
जले स्थले निवासिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्॥६॥

विशिष्टसृष्टिकारिणीं विशालरूपधारिणीम्।
महोदरे विलासिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्॥७॥

पुरन्दरादिसेवितां मुरादिवंशखण्डनीम्।
विशुद्धबुद्धिकारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्॥८॥

॥ इति श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् — वीडियो

श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् — कब पढ़ें

माँ दुर्गा की आराधना का दिन मंगलवार है — अगला मंगलवार, 20 अक्टूबर को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

अगला संबंधित व्रत

माँ दुर्गा से जुड़ा अगला व्रत — मासिक दुर्गाष्टमी, सोमवार, 19 अक्टूबर (4 दिन बाद)।

माँ दुर्गा मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; माँ दुर्गा की आराधना का वार मंगलवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **रुद्राक्ष अथवा लाल चन्दन** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

माँ दुर्गा के अन्य पाठ