आरती श्री संतोषी माँ जी की
माँ दुर्गा · Durga · आरती
आरती श्री संतोषी माँ जी की के बोल
जय संतोषी माता मैया जय संतौषी माता।
अपने जन को सुख सम्पत्ति दाता॥ जय.
सुन्दर वीर सुनहरी माँ धारण कीन्हों।
हीरा पन्ना दमके तन शृंगार लीन्हों॥ जय.
गेरू लाल छटा छवि बदन कमल सोहे।
मन्द हँसत करुणामयी त्रिभुवन मन मोहे॥ जय.
स्वर्ण सिंहासन बैठी चँवर ढुरे प्यारे।
धूप, दीप, नैवेद्य, मधुमेवा भोग धरे न्यारे॥ जय.
गुड़ अरु चना परम प्रिय तामें संतोष कियो।
संतोषी कहलाई भक्तन वैभव दियो॥ जय.
शुक्रवार प्रिया मानत आज दिवस सोही।
भक्ति मण्डली छाई कथा सुनत मोही॥ जय.
मन्दिर जगमग ज्योति मंगल ध्वनि छाई।
विनय करें हम बालक चरनन सिर नाई॥ जय.
भक्ति भावमय पूजा अंगीकृत कीजै।
जो मन बसै हमारे इच्छा फल दीजै॥ जय.
— स्रोत: रणधीर प्रकाशन, ५१ चालीसा संग्रह, पृष्ठ 240
आरती श्री संतोषी माँ जी की — कब पढ़ें
माँ दुर्गा की आराधना का दिन मंगलवार है — अगला मंगलवार, 27 अक्टूबर को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
अगला संबंधित व्रत
माँ दुर्गा से जुड़ा अगला व्रत — मासिक दुर्गाष्टमी, मंगलवार, 17 नवंबर (23 दिन बाद)।