गुरुवार — भगवान विष्णु / बृहस्पति की आराधना

मंत्र · व्रत · दान · उपाय

गुरुवार के मंत्र

विष्णु मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

गुरु बीज मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

(108 बार जप विशेष फलदायी)

पाठ व पूजा

विष्णु सहस्रनाम या बृहस्पति व्रत-कथा का पाठ।

व्रत

गुरुवार व्रत — विवाह, संतान व गुरु-कृपा हेतु; केले के वृक्ष की पूजा।

दान व शुभ रंग

दानचने की दाल, पीत वस्त्र व केले का दान
शुभ रंगपीला

गुरुवार के स्वामी ग्रह इस समय कहाँ हैं

गुरुवार का स्वामी ग्रह गुरु है, और इस समय वे कर्क राशि में हैं। 31 अक्टू॰ 2026 को ये सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

जिस वार की पूजा की जाती है, उसका फल उस वार के स्वामी की गोचर-स्थिति से भी जुड़ा रहता है — इसीलिए गुरुवार के उपाय करते समय गुरु की वर्तमान स्थिति देख लेना उचित होता है। यह स्थिति निरयन (लाहिरी) गणना से निकाली गई है और प्रतिदिन बदलती है।

अगला गुरुवार — 15 अक्टूबर 2026

सूर्योदय06:21
सूर्यास्त17:51
राहुकाल13:33 – 14:59
यमगण्ड06:21 – 07:48
गुलिक काल09:14 – 10:40
अभिजीत मुहूर्त11:43 – 12:29
ब्रह्म मुहूर्त04:45 – 05:33

गुरुवार का व्रत व पूजा ब्रह्म मुहूर्त अथवा प्रातःकाल में आरंभ करना श्रेष्ठ है। राहुकाल में नया संकल्प न लें — नित्य जप व पूजा तब भी निर्बाध चलती है। इस दिन शुभ चौघड़िया: शुभ 06:21–07:48, लाभ 12:06–13:33, अमृत 13:33–14:59, शुभ 16:25–17:51। (नई दिल्ली के सूर्योदय पर — अपने शहर का समय देखें।)

गुरुवार की पूर्णिमा — अगली तिथि

गुरुवार को पड़ने वाली पूर्णिमा गुरु-कृपा हेतु विशेष कही गई है।

  • पूर्णिमा — गुरुवार, 20 मई 2027

ये तिथियाँ खगोलीय गणना से निकाली गई हैं। पूरा व्रत कैलेंडर देखें।

गुरुवार व्रत की विधि

प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु / बृहस्पति का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। विष्णु सहस्रनाम या बृहस्पति व्रत-कथा का पाठ।

दिन भर फलाहार अथवा एक समय सात्विक भोजन का विधान है; पीला रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। संध्या-काल में दीपक जलाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें — कम से कम एक माला (108 बार)।

व्रत के अंत में चने की दाल, पीत वस्त्र व केले का दान करने का विधान है। व्रत की संख्या (5, 11, 16 अथवा 21 गुरुवार) संकल्प के अनुसार तय की जाती है, और अंतिम गुरुवार को उद्यापन किया जाता है।

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