ॐ जय जगदीश हरे
भगवान विष्णु · Vishnu · आरती
ॐ जय जगदीश हरे के बोल
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी, स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खलकामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥
दीनबन्धु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरा॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥
ॐ जय जगदीश हरे — कब पढ़ें
भगवान विष्णु की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 15 अक्टूबर को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
गुरु की वर्तमान स्थिति
गुरु इस समय कर्क राशि में हैं, और 1 नव॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
अगला संबंधित व्रत
भगवान विष्णु से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, गुरुवार, 22 अक्टूबर (12 दिन बाद)।