शुक्रवार — माँ लक्ष्मी की आराधना

आज शुक्रवार है · 9 अक्टूबर 2026

शुक्रवार के मंत्र

लक्ष्मी मंत्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

शुक्र बीज मंत्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

(108 बार जप विशेष फलदायी)

पाठ व पूजा

श्रीसूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ।

व्रत

शुक्रवार (वैभव लक्ष्मी) व्रत — धन, सुख व दांपत्य हेतु।

दान व शुभ रंग

दानश्वेत वस्तु, खीर व मिश्री का दान
शुभ रंगश्वेत / गुलाबी

शुक्रवार के स्वामी ग्रह इस समय कहाँ हैं

शुक्रवार का स्वामी ग्रह शुक्र है, और इस समय वे तुला राशि में वक्री अवस्था में हैं। 6 नव॰ 2026 को ये कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।

जिस वार की पूजा की जाती है, उसका फल उस वार के स्वामी की गोचर-स्थिति से भी जुड़ा रहता है — इसीलिए शुक्रवार के उपाय करते समय शुक्र की वर्तमान स्थिति देख लेना उचित होता है। यह स्थिति निरयन (लाहिरी) गणना से निकाली गई है और प्रतिदिन बदलती है।

आज शुक्रवार है — आज के शुभ-अशुभ काल

सूर्योदय06:18
सूर्यास्त17:58
राहुकाल10:40 – 12:08
यमगण्ड15:03 – 16:30
गुलिक काल07:45 – 09:13
अभिजीत मुहूर्त11:44 – 12:31
ब्रह्म मुहूर्त04:42 – 05:30

शुक्रवार का व्रत व पूजा ब्रह्म मुहूर्त अथवा प्रातःकाल में आरंभ करना श्रेष्ठ है। राहुकाल में नया संकल्प न लें — नित्य जप व पूजा तब भी निर्बाध चलती है। इस दिन शुभ चौघड़िया: लाभ 07:45–09:13, अमृत 09:13–10:40, शुभ 12:08–13:35। (नई दिल्ली के सूर्योदय पर — अपने शहर का समय देखें।)

शुक्रवार को पड़ने वाले आगामी व्रत

  • शुक्ल पक्ष एकादशी — शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
  • शुक्ल प्रदोष — शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
  • पूर्णिमा — शुक्रवार, 22 जनवरी 2027

ये तिथियाँ खगोलीय गणना से निकाली गई हैं। पूरा व्रत कैलेंडर देखें।

शुक्रवार व्रत की विधि

प्रातः स्नान कर माँ लक्ष्मी का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। श्रीसूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ।

दिन भर फलाहार अथवा एक समय सात्विक भोजन का विधान है; श्वेत / गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। संध्या-काल में दीपक जलाकर ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः का जप करें — कम से कम एक माला (108 बार)।

व्रत के अंत में श्वेत वस्तु, खीर व मिश्री का दान करने का विधान है। व्रत की संख्या (5, 11, 16 अथवा 21 शुक्रवार) संकल्प के अनुसार तय की जाती है, और अंतिम शुक्रवार को उद्यापन किया जाता है।

संबंधित पाठ व पर्व